Tranding
Tuesday, October 20, 2026

News Desk / News Delhi /October 20, 2026

हम आमतौर पर मानव मस्तिष्क को एक ही अंग के रूप में देखते हैं, जो सोचने, समझने, बोलने और याद रखने से लेकर सांस लेने तथा निगलने जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियों को नियंत्रित करता है। लेकिन स्टैनफोर्ड मेडिसिन के नेतृत्व में किए गए एक नए वैज्ञानिक अध्ययन ने मस्तिष्क की उत्पत्ति को लेकर हमारी पारंपरिक समझ के सामने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, मस्तिष्क के आगे और पीछे के हिस्से भ्रूण के शुरुआती विकास के दौरान ही अलग-अलग कोशिकीय स्रोतों से विकसित होते हैं।

विज्ञान / क्या इंसानी दिमाग दो प्राचीन तंत्रिका प्रणालियों का मेल है? नई रिसर्च ने खोला 55 करोड़ साल पुराना राज - संजय सक्सैना | वरिष्ठ विश्लेषक एवं विचारक

नेचर न्यूरोसाइंस (Nature Neuroscience) में 18 सितंबर 2026 को प्रकाशित इस अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि मानव मस्तिष्क की विकास यात्रा संभवतः दो अलग-अलग प्रारंभिक तंत्रिका कोशिका समूहों से शुरू होती है। शोधकर्ताओं ने लगभग 55 करोड़ वर्ष पुराने विकासवादी इतिहास तक इसके संकेत खोजे हैं। यह खोज न केवल मस्तिष्क के विकास को समझने का नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, बल्कि कुछ गंभीर तंत्रिका संबंधी बीमारियों के अध्ययन के लिए भी नई संभावनाएं खोलती है।

क्या मस्तिष्क की शुरुआत एक ही कोशिकीय स्रोत से नहीं हुई?


लंबे समय से वैज्ञानिक मस्तिष्क के विकास को इस रूप में समझते रहे हैं कि भ्रूण की शुरुआती अवस्था में मौजूद कोशिकाओं से आगे चलकर मस्तिष्क के विभिन्न हिस्से बनते हैं। हालांकि, नए अध्ययन में शोधकर्ताओं को ऐसे प्रमाण मिले हैं, जिनके अनुसार मस्तिष्क के अलग-अलग क्षेत्रों के निर्माण में शामिल शुरुआती कोशिका समूहों की विकास संबंधी पहचान पहले से ही अलग होती है।

वयस्क मानव मस्तिष्क को मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में बांटा जाता है—फोरब्रेन (अग्र मस्तिष्क), मिडब्रेन (मध्य मस्तिष्क) और हिंडब्रेन (पश्च मस्तिष्क)।

फोरब्रेन और मिडब्रेन के विकास में एक प्रकार की शुरुआती कोशिकाएं योगदान देती हैं, जबकि हिंडब्रेन का निर्माण एक अलग कोशिकीय समूह से होता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि वयस्क मानव मस्तिष्क शारीरिक रूप से दो अलग-अलग अंगों में बंटा हुआ है। बल्कि, यह खोज बताती है कि मस्तिष्क के इन हिस्सों की भ्रूणीय उत्पत्ति और विकास के शुरुआती रास्ते अलग हो सकते हैं।

दो कोशिका समूह, दो अलग विकास मार्ग


मस्तिष्क के आगे के हिस्से का संबंध भाषा, चेतना, तर्क, स्मृति और जटिल विचार प्रक्रियाओं से है। इसके विपरीत, हिंडब्रेन शरीर की कई महत्वपूर्ण स्वचालित गतिविधियों के संचालन में भूमिका निभाता है।

इनमें प्रमुख हैं:
- सांस लेने और हृदय गति के नियमन से जुड़ी प्रक्रियाएं।
- निगलने की क्रिया।
- चेहरे, जीभ और गले की मांसपेशियों का नियंत्रण।
- भूख और शरीर की कुछ अन्य स्वचालित प्रक्रियाओं का नियमन।

इस प्रकार, मस्तिष्क का पिछला हिस्सा हमारी जीवनरक्षक गतिविधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद, वैज्ञानिकों को लंबे समय से प्रयोगशाला में मानव हिंडब्रेन के विशिष्ट न्यूरॉन विकसित करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।

नया अध्ययन इस समस्या को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।

चूहे के भ्रूण में मिला अहम वैज्ञानिक सुराग


शोधकर्ताओं ने विकसित हो रहे चूहे के भ्रूणों का अध्ययन करते हुए मस्तिष्क के शुरुआती विकास में शामिल दो अलग-अलग कोशिका समूहों की पहचान की।

इन समूहों में दो जीन विशेष रूप से महत्वपूर्ण पाए गए— Otx2 और Gbx2।

Otx2 जीन को व्यक्त करने वाली कोशिकाएं आगे चलकर फोरब्रेन और मिडब्रेन के निर्माण में योगदान देती हैं, जबकि Gbx2 जीन को व्यक्त करने वाली कोशिकाएं हिंडब्रेन के विकास से जुड़ी होती हैं।

अध्ययन में इन दोनों कोशिका समूहों की विकास संबंधी पहचान और उनके बीच अंतर के प्रमाण मिले। शोधकर्ताओं ने पाया कि शुरुआती अवस्था में ही इन कोशिकाओं के विकास मार्ग अलग दिखाई देते हैं।

यह निष्कर्ष महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे मस्तिष्क के विभिन्न क्षेत्रों के निर्माण को केवल एक समान प्रारंभिक कोशिकीय स्रोत से निकली क्रमिक प्रक्रिया के रूप में समझने की पारंपरिक धारणा पर पुनर्विचार करने का आधार मिलता है।

केवल जीन नहीं, डीएनए की संरचना में भी मिला अंतर


शोधकर्ताओं ने कोशिकाओं में डीएनए की पैकेजिंग और व्यवस्था का भी अध्ययन किया। डीएनए जिस संरचना में कोशिका के भीतर व्यवस्थित रहता है, उसे क्रोमैटिन (Chromatin) कहा जाता है।

अध्ययन में फोरब्रेन और मिडब्रेन की ओर विकसित होने वाली कोशिकाओं तथा हिंडब्रेन की ओर विकसित होने वाली कोशिकाओं के क्रोमैटिन विन्यास में महत्वपूर्ण अंतर पाया गया।

डीएनए की यह संरचना निर्धारित करने में भूमिका निभाती है कि कोशिका के भीतर कौन-से जीन सक्रिय हो सकते हैं और कौन-से अपेक्षाकृत निष्क्रिय रहते हैं। इस प्रकार, कोशिकाओं की विकास संबंधी पहचान केवल जीन की सक्रियता से ही नहीं, बल्कि उनकी आंतरिक जैविक व्यवस्था से भी जुड़ी होती है।

यह अंतर समझने में मदद करता है कि शुरुआती कोशिकाएं अलग-अलग प्रकार के न्यूरॉन बनाने की दिशा में क्यों बढ़ती हैं।

प्रयोगशाला में हिंडब्रेन न्यूरॉन बनाना क्यों था मुश्किल?


इस अध्ययन का एक महत्वपूर्ण परिणाम मानव स्टेम सेल अनुसंधान से संबंधित है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, पहले प्रयोगशालाओं में हिंडब्रेन न्यूरॉन विकसित करने में आने वाली कुछ कठिनाइयों की वजह यह हो सकती है कि वैज्ञानिक ऐसी शुरुआती कोशिकाओं को हिंडब्रेन न्यूरॉन में बदलने का प्रयास कर रहे थे, जिनकी विकास संबंधी पहचान पहले ही किसी दूसरे मस्तिष्क क्षेत्र की ओर निर्धारित हो चुकी थी।

नई जानकारी के आधार पर शोधकर्ताओं ने मानव प्लूरिपोटेंट स्टेम सेल (Pluripotent Stem Cells) से कार्यात्मक हिंडब्रेन मोटर न्यूरॉन विकसित किए।

इन प्रयोगशाला-निर्मित कोशिकाओं में विद्युत गतिविधि देखी गई। साथ ही, उनमें ऐसे प्रोटीन भी पाए गए, जो हिंडब्रेन के उन हिस्सों से जुड़े न्यूरॉन की पहचान में मदद करते हैं, जो चेहरे की मांसपेशियों और निगलने की क्रिया को नियंत्रित करते हैं।

इस सफलता से वैज्ञानिकों को मानव हिंडब्रेन के न्यूरॉन का अध्ययन करने के लिए एक उपयोगी प्रयोगशाला मॉडल मिला है।

ALS और SMA जैसी बीमारियों के अध्ययन में मिल सकती है मदद


इस खोज का महत्व केवल मस्तिष्क की उत्पत्ति को समझने तक सीमित नहीं है। यह कुछ गंभीर न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों के अध्ययन में भी उपयोगी हो सकती है।

स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) और एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (ALS) ऐसी बीमारियां हैं, जिनमें मोटर न्यूरॉन प्रभावित होते हैं। ये न्यूरॉन मांसपेशियों की गतिविधियों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके प्रभावित होने से चलने-फिरने, निगलने और सांस लेने जैसी क्षमताओं पर गंभीर असर पड़ सकता है।

जीवित मरीजों से मस्तिष्क के भीतर के ऊतक प्राप्त करके उनका अध्ययन करना बेहद कठिन है। ऐसे में प्रयोगशाला में संबंधित प्रकार के मानव न्यूरॉन विकसित कर पाना शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

इस मॉडल की मदद से वैज्ञानिक भविष्य में यह जांच कर सकते हैं कि:
- बीमारी की शुरुआत में न्यूरॉन के भीतर कौन-से जैविक बदलाव होते हैं।
- कुछ विशेष प्रकार के न्यूरॉन दूसरों की तुलना में अधिक प्रभावित क्यों होते हैं।
- न्यूरॉन की कार्यक्षमता में गिरावट लाने वाले तंत्र क्या हैं।
- संभावित दवाओं और उपचारों का परीक्षण करने के लिए कौन-से प्रयोगशाला मॉडल उपयोगी हो सकते हैं।

हालांकि, यह स्पष्ट रहना चाहिए कि प्रयोगशाला में न्यूरॉन विकसित कर लेना किसी बीमारी के इलाज की खोज के समान नहीं है। इस उपलब्धि का तात्कालिक महत्व बीमारियों के जैविक तंत्र को समझने और भविष्य के उपचार संबंधी अनुसंधान को बेहतर आधार देने में है।

करीब 55 करोड़ साल पुराने विकासवादी इतिहास तक पहुंचे वैज्ञानिक


अध्ययन का एक और दिलचस्प पहलू इसका विकासवादी महत्व है।

शोधकर्ताओं ने लगभग 55 करोड़ वर्षों के विकासवादी इतिहास को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग प्रजातियों में तंत्रिका तंत्र के विकास की तुलना की। उन्हें चूहों, मुर्गियों और जेब्राफिश के अलावा एकॉर्न वर्म जैसे दूर के विकासवादी संबंध वाले जीवों में भी दो अलग तंत्रिका विकास स्रोतों से जुड़े संकेत मिले।

एकॉर्न वर्म समुद्र की तलहटी में रहने वाला जीव है। मनुष्यों के साथ इसका विकासवादी संबंध बहुत दूर का है। इसके बावजूद, इस तरह के जीव में समान विकास संबंधी संकेत मिलना शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है।

इन निष्कर्षों से यह संभावना मजबूत होती है कि तंत्रिका तंत्र के अलग-अलग विकास मार्गों का इतिहास मनुष्य और अन्य आधुनिक कशेरुकी जीवों के अस्तित्व में आने से बहुत पहले शुरू हो चुका था।

शोधकर्ताओं के अनुसार, विकास की लंबी प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग तंत्रिका प्रणालियां स्थानिक रूप से एक-दूसरे के करीब आईं और जटिल मस्तिष्क संरचना के निर्माण का हिस्सा बनीं।

हालांकि, उपलब्ध प्रमाणों को इस बात का अंतिम सबूत नहीं समझना चाहिए कि आधुनिक मानव मस्तिष्क का निर्माण ठीक किस समय और किस क्रम में दो स्वतंत्र अंगों के जुड़ने से हुआ। अध्ययन मुख्य रूप से अलग-अलग भ्रूणीय कोशिकीय स्रोतों और उनके विकासवादी संबंधों पर प्रकाश डालता है।

भूख, चयापचय और वजन से जुड़े शोध के लिए भी अहम


हिंडब्रेन शरीर की कई स्वचालित प्रक्रियाओं के अलावा भूख से जुड़े तंत्रों में भी भूमिका निभाता है। इसी वजह से इसके न्यूरॉन के विकास और कार्यप्रणाली को समझना चयापचय (Metabolism) तथा वजन नियंत्रण से संबंधित अनुसंधान के लिए भी उपयोगी हो सकता है।

वजन घटाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कुछ आधुनिक दवाएं, जैसे सेमाग्लूटाइड (Semaglutide), भूख और भोजन सेवन को प्रभावित करने वाले जैविक संकेतों पर काम करती हैं।

हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि मस्तिष्क की उत्पत्ति से जुड़ी यह नई खोज सीधे तौर पर वजन घटाने की दवाओं में किसी नए उपचार का रास्ता खोलती है। फिलहाल, इसकी अहमियत उन तंत्रिका कोशिकाओं को बेहतर ढंग से समझने में है, जो भूख और शरीर की अन्य प्रक्रियाओं से संबंधित हैं।

मस्तिष्क की उत्पत्ति को लेकर बदलेगी वैज्ञानिक समझ?


मानव मस्तिष्क को अक्सर शरीर के सबसे जटिल अंगों में से एक माना जाता है। इसकी संरचना, कार्यप्रणाली और विकास को समझने के लिए वैज्ञानिक लंबे समय से शोध कर रहे हैं।

स्टैनफोर्ड मेडिसिन के नेतृत्व में हुआ यह अध्ययन मस्तिष्क के विकास की शुरुआती प्रक्रिया को देखने का एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। इससे पता चलता है कि मस्तिष्क के आगे और पीछे के क्षेत्रों के निर्माण में शामिल कोशिकीय समूहों की पहचान शुरुआती भ्रूणीय अवस्था में ही अलग हो सकती है।

इस खोज का महत्व तीन स्तरों पर है—मस्तिष्क के विकास की बेहतर समझ, मानव न्यूरॉन विकसित करने की प्रयोगशाला तकनीकों में सुधार और गंभीर तंत्रिका संबंधी बीमारियों के अध्ययन के लिए नए मॉडल।

आखिरकार, सवाल सिर्फ यह नहीं है कि हमारा मस्तिष्क कैसे काम करता है, बल्कि यह भी है कि इसकी जटिल संरचना बनने की शुरुआत कैसे हुई।

करीब 55 करोड़ वर्षों के विकासवादी इतिहास से जुड़े संकेतों के साथ यह शोध उसी बुनियादी सवाल की पड़ताल करता है। मानव मस्तिष्क की कहानी अभी पूरी तरह समझी नहीं गई है और संभव है कि उसकी उत्पत्ति से जुड़े कई महत्वपूर्ण रहस्य आने वाले वर्षों में सामने आएं।

स्रोत: स्टैनफोर्ड मेडिसिन की 18 सितंबर 2026 की शोध-संबंधी रिपोर्ट तथा *Nature Neuroscience* में प्रकाशित अध्ययन।

Subscribe

Trending

24 Jobraa Times

भारतीय लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को बनाये रखने व लोकतंत्र को जिंदा रखने के लिए सवंत्रता, समानता, बन्धुत्व व न्याय की निष्पक्ष पत्रकारिता l

Subscribe to Stay Connected

2025 © 24 JOBRAA - TIMES MEDIA & COMMUNICATION PVT. LTD. All Rights Reserved.