इस पुस्तक की समीक्षा करते हुए साहित्यकार डॉ. चंद्रदत्त शर्मा ‘चंद्रकवि’ (रोहतक) ने इसे भक्ति साहित्य की एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी कृति बताया है।
मानव जीवन में भक्ति का महत्व:
समीक्षक के अनुसार मानव जीवन अत्यंत अनमोल है और यदि उसमें प्रभु भक्ति का समावेश हो जाए तो जीवन स्वर्ण से भी अधिक मूल्यवान बन जाता है। जब व्यक्ति की हर सांस प्रभु स्मरण में लीन हो जाती है, तब जीवन का प्रत्येक क्षण आनंद और शांति से भर उठता है। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति प्राप्त होना पूर्व जन्मों के पुण्यों का परिणाम होता है और यही मनुष्य जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है।
23 भजनों से सजी है भजनावली:
पुस्तक
‘श्री सत्यनारायण भगवान कथा दर्शन’ में कुल
23 भक्तिपरक भजनों का संकलन किया गया है। पुस्तक का प्रारंभ भगवान श्री नारायण की आरती से होता है, जो एक मंगलाचरण के रूप में पाठकों को आध्यात्मिक वातावरण में प्रवेश कराता है। इस कृति की एक विशेषता यह भी है कि लेखक ने केवल भजन ही नहीं लिखे, बल्कि उनके
भावार्थ और साहित्यिक विश्लेषण भी प्रस्तुत किए हैं, जिससे सामान्य पाठक भी भजनों के गूढ़ अर्थ को आसानी से समझ सकता है।
हिंदी और हरियाणवी भाषा का सुंदर संगम:
डॉ. अशोक कुमार जाखड़ की लेखनी में
हिंदी और हरियाणवी भाषा का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है। इससे यह भजनावली लोकजीवन से सीधे जुड़ती है और आम पाठकों के लिए अधिक सहज और प्रभावी बन जाती है। भजनों के बीच ‘वार्ता’ शैली का प्रयोग करते हुए कथा को आगे बढ़ाया गया है, जिससे पाठक को कथा की निरंतरता और भाव प्रवाह का अनुभव होता है।
नैमिषारण्य और वेद-पुराण का उल्लेख:
कवि ने अपने भजनों में नैमिषारण्य तीर्थ का भी उल्लेख किया है, जिसे 88 हजार ऋषि-मुनियों की तपोभूमि माना जाता है। पुस्तक में वेद-पुराण, गीता ज्ञान, नवधा भक्ति और विभिन्न धार्मिक प्रसंगों का उल्लेख भी किया गया है, जो इसे आध्यात्मिक और दार्शनिक दृष्टि से समृद्ध बनाते हैं।
भक्ति की नौका समान कृति:
समीक्षक डॉ. चंद्रदत्त शर्मा के अनुसार यह भजनावली भक्तों के लिए रसास्वादन का माध्यम है और भक्ति में डूबी आत्मा के लिए मानसरोवर के समान है। उन्होंने कहा कि डॉ. अशोक कुमार जाखड़ ने भगवान श्री सत्यनारायण की व्रत कथा को भजनों के माध्यम से इस प्रकार प्रस्तुत किया है कि पाठकों को मानो एक आध्यात्मिक तीर्थ के दर्शन हो जाते हैं। यह कृति वास्तव में भक्ति की ऐसी नौका है जो मनुष्य को भवसागर से पार लगाने का संदेश देती है।