वेकेशन बेंच ने तत्काल सूचीबद्ध करने से किया इनकार :
मामले का उल्लेख दिल्ली हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच के समक्ष किया गया, जिसमें न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी और न्यायमूर्ति अमित शर्मा शामिल थे। याचिकाकर्ता की ओर से मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की गई, लेकिन अदालत ने इसे तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया।
याचिका में सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई गईं :
याचिका में दावा किया गया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ वीडियो में प्रदर्शनकारियों को दिल्ली हवाई अड्डे पर बड़े पैमाने पर व्यवधान उत्पन्न करने तथा पुलिस की भीड़ नियंत्रण कार्रवाई का आक्रामक तरीके से विरोध करने के लिए उकसाया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि कुछ वीडियो में पेपर स्प्रे और लाठियों जैसे साधनों का उल्लेख किया गया है, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
इन परिस्थितियों को देखते हुए याचिका में दिल्ली पुलिस और संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों को आवश्यक एहतियाती एवं नियामक निर्देश जारी करने की मांग की गई थी।
6 जून को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित है CJP का प्रदर्शन :
कोकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 6 जून को नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर प्रदर्शन आयोजित करने का आह्वान किया है। प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) से जुड़े विवादों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को बताया जा रहा है।
पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के अमेरिका से दिल्ली पहुंचकर इस आंदोलन में शामिल होने की भी जानकारी सामने आई है।
CJP ने प्रदर्शन को बताया शांतिपूर्ण
CJP के प्रवक्ताओं और आयोजकों ने दावा किया है कि प्रस्तावित प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक होगा। संगठन ने विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े युवाओं और नागरिकों से बिना किसी राजनीतिक दल या संगठन के झंडे-बैनर के शामिल होने की अपील की है।
आयोजकों के अनुसार यह अभियान युवाओं की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का प्रयास है तथा इसका उद्देश्य शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना है।
सोशल मीडिया से शुरू हुआ आंदोलन :
बताया जाता है कि इस आंदोलन की पृष्ठभूमि एक न्यायिक टिप्पणी से जुड़ी है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर युवाओं के बीच "Cockroach Janta Party" नामक व्यंग्यात्मक राजनीतिक अभियान चर्चा में आया। बाद में यह अभियान विभिन्न शिक्षा और युवा मुद्दों को लेकर एक संगठित विरोध आंदोलन के रूप में विकसित हुआ।
पहले भी PIL दायर करता रहा है Save India Foundation :
Save India Foundation पूर्व में भी कई जनहित याचिकाएं दायर कर चुका है। संगठन सार्वजनिक नीति, सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे विषयों पर अदालतों का रुख करता रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट विभिन्न अवसरों पर संस्था द्वारा दायर याचिकाओं पर टिप्पणियां भी कर चुका है।