शिव मोहन गुप्ता ने कहा कि देश में पेपर लीक की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं, लेकिन दोषियों पर कोई बड़ी कार्रवाई दिखाई नहीं देती। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आरोपियों की गिरफ्तारी होती भी है, तो उन्हें कड़ी सजा क्यों नहीं मिलती।
उन्होंने कहा कि NEET 2026 परीक्षा में लगभग 22 लाख छात्रों ने भाग लिया था, लेकिन पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द कर दी गई। अब दोबारा परीक्षा कराने की तैयारी की जा रही है, जिससे छात्रों और अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
“दोबारा परीक्षा से बढ़ेगा आर्थिक बोझ” :
AAP नेता ने कहा कि परीक्षा दोबारा होने पर लाखों छात्रों को फिर से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचना पड़ेगा, जिससे पेट्रोल-डीजल और अन्य संसाधनों पर भारी खर्च होगा। उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर की परीक्षा आयोजित करने में हजारों शिक्षकों, परीक्षा केंद्रों और प्रशासनिक कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है, जिससे करोड़ों रुपये खर्च होते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग पेपर बेचकर करोड़ों रुपये की कमाई कर लेते हैं, जबकि मेहनत करने वाले छात्रों को मानसिक तनाव और नुकसान झेलना पड़ता है।
“कोटा में बढ़ता दबाव और छात्रों की आत्महत्या चिंता का विषय” :
शिव मोहन गुप्ता ने कोटा में छात्रों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों पर अत्यधिक मानसिक दबाव है और इसी कारण कई छात्र आत्महत्या जैसे कदम उठा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि दिन-रात मेहनत करने वाले छात्रों को जब पेपर लीक जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है, तो उनका मनोबल टूट जाता है। उन्होंने सरकार से छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीरता से काम करने की मांग की।
“एक पेपर सुरक्षित नहीं, फिर देश की सुरक्षा के दावे कैसे?” :
AAP नेता ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि जब एक राष्ट्रीय परीक्षा का पेपर सुरक्षित नहीं रह पा रहा, तो सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि देश के लाखों परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए गहने और संपत्ति तक बेच देते हैं, लेकिन सरकार उनकी मेहनत की रक्षा करने में नाकाम साबित हो रही है।
NTA को बंद करने की मांग :
शिव मोहन गुप्ता ने मांग की कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को तत्काल प्रभाव से भंग किया जाए और उसकी जगह नई एवं निष्पक्ष एजेंसी बनाई जाए, जो पारदर्शी तरीके से परीक्षाएं आयोजित कर सके।
उन्होंने कहा कि यदि पेपर लीक की घटनाएं नहीं रुकीं तो छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता के मुद्दों को दबाने के लिए नई “ब्रेकिंग न्यूज” का सहारा लेती है।