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Friday, August 29, 2025

24JT News Desk / Udaipur /July 18, 2025

18 जुलाई को पूरी दुनिया में नेल्सन मंडेला जयंती मनाई जाती है। यह दिन केवल एक महान नेता की जयंती नहीं है, बल्कि मानवाधिकारों, स्वतंत्रता, और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष की एक जीवंत मिसाल को याद करने का दिन है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित यह दिवस आज एक वैश्विक पर्व बन चुका है।

"सत्य, समानता और मानवता के प्रतीक: नेल्सन मंडेला" | Photo Source : https://www.britannica.com/facts/Nelson-Mandela
अन्तर्राष्ट्रीय / "सत्य, समानता और मानवता के प्रतीक: नेल्सन मंडेला"

नेल्सन मंडेला दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति थे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नस्लभेद के खिलाफ संघर्ष के प्रतीक माने जाते हैं। उन्होंने अपने जीवन के 27 वर्ष जेल में बिताए, लेकिन कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। "अखंड साहस, क्षमा की भावना और अटूट विश्वास" उनके जीवन के प्रमुख स्तंभ थे।

उनका यह प्रसिद्ध कथन आज भी प्रेरणा देता है:


"स्वतंत्र होना केवल अपनी ज़ंजीरों से मुक्त होना नहीं है, बल्कि दूसरों की स्वतंत्रता का सम्मान और उसे बढ़ावा देना भी है।"

भारत में भी नेल्सन मंडेला को अत्यंत सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर मंडेला ने अहिंसात्मक आंदोलन की राह अपनाई। दोनों नेताओं की सोच में गहरी समानता थी — दोनों ने अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी, पर हिंसा के रास्ते से दूर रहकर।

आज के समय में जब दुनिया कई सामाजिक और राजनीतिक संघर्षों से गुजर रही है, नेल्सन मंडेला की विरासत हमें यह सिखाती है कि बदलाव लाने के लिए धैर्य, संवाद और सहानुभूति सबसे सशक्त हथियार हैं।

इस नेल्सन मंडेला जयंती पर आइए संकल्प लें:


हम अपने समाज में समानता, सद्भाव और न्याय की भावना को बढ़ावा देंगे और उनके दिखाए मार्ग पर चलने का प्रयास करेंगे।

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