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Friday, May 1, 2026

News Desk / News Delhi /April 30, 2026

हमारे ब्रह्मांड के बारे में जानने का मन हर इंसान का होता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जहां हमें खाली अंतरिक्ष और अंधेरे के सिवा कुछ नहीं दिखाई देता, वहीं पर जीवन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियाँ छिपी हो सकती हैं? आइए जानते हैं, संजय सक्सेना, वरिष्ठ विश्लेषक एवं विचारक के इस लेख के माध्यम से। हाल ही में नासा ने एक ऐसी खोज की है, जो न केवल खगोलशास्त्र, बल्कि जीवन की उत्पत्ति के रहस्यों को भी उजागर करती है। नासा के SPHEREx मिशन ने जो खोज की है, वह हमारे ब्रह्मांड के एक नए पहलू को सामने लाती है: विशाल बर्फीले क्षेत्रों का जो जीवन के लिए जरूरी तत्वों का खजाना हो सकते हैं।

विज्ञान / अंतरिक्ष के ‘बर्फीले गोदाम’ में छिपा जीवन का खजाना: NASA के SPHEREx मिशन से बड़ा खुलासा - संजय सक्सैना

ब्रह्मांड का बर्फीला खजाना: जीवन की उत्पत्ति का नया सिद्धांत :


नासा ने हमारी आकाशगंगा, मिल्की वे, में इंटरस्टेलर ग्लेशियर नामक बर्फीले क्षेत्रों का पता लगाया है। यह बर्फीले बादल कोई साधारण बर्फ नहीं हैं। इनमें पानी, कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे महत्वपूर्ण तत्व होते हैं, जो भविष्य में बनने वाले ग्रहों पर पानी और जीवन के लिए जरूरी सामग्री की आपूर्ति कर सकते हैं। जब हम पृथ्वी पर पानी के स्रोत के बारे में सोचते हैं, तो यह सवाल अक्सर उठता है कि यह पानी आया कहां से। अब यह साफ हो गया है कि पृथ्वी पर पानी शायद इन अंतरिक्ष के ठंडे और बर्फीले इलाकों से आकर पहुंचा है।

SPHEREx: एक क्रांतिकारी मिशन :


नासा के SPHEREx (स्पेक्ट्रो-फोटोमीटर फॉर द हिस्ट्री ऑफ द यूनिवर्स, एपोक ऑफ रीआयोनाइजेशन एंड आइस एक्सप्लोरर) टेलिस्कोप ने अंतरिक्ष में इन बर्फीली संरचनाओं का पहला 3D मैप तैयार किया है। इस टेलिस्कोप की विशेषता यह है कि यह केवल तस्वीरें नहीं खींचता, बल्कि यह प्रकाश की सूक्ष्म तरंगों (इन्फ्रारेड लाइट) के आधार पर यह पहचान सकता है कि अंतरिक्ष में किस स्थान पर पानी या अन्य जीवनदायिनी गैसें मौजूद हैं। इस टेलिस्कोप की मदद से वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांड के उन हिस्सों का नक्शा तैयार किया है, जो जीवन के निर्माण के लिए जरूरी तत्वों से भरे हुए हैं।

बर्फ का जीवन से गहरा संबंध :


इंटरस्टेलर ग्लेशियर की इन बर्फीली परतों में पानी और अन्य रसायन किसी गुप्त खजाने की तरह छिपे हुए हैं। इन बर्फीले बादलों का अस्तित्व ऐसे वातावरण में होता है, जहां बाहरी अंतरिक्ष की खतरनाक अल्ट्रावॉयलेट किरणें इन तत्वों को नुकसान नहीं पहुंचातीं। यह बर्फीली परतें ग्रहों के निर्माण में अहम भूमिका निभाती हैं, क्योंकि यह जीवन के लिए आवश्यक पानी और कार्बन जैसे रसायनों का खजाना प्रदान करती हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी का पानी भी इन अंतरस्टेलर ग्लेशियर से ही आया हो सकता है। इन क्षेत्रों में बर्फ जमा रहती है और जैसे ही नया सौर मंडल या नया तारा बनता है, यह बर्फ ग्रहों के निर्माण में मदद करती है। यही कारण है कि इन बर्फीली संरचनाओं को 'प्राकृतिक गोदाम' के रूप में देखा जा रहा है, जो जीवन के निर्माण के लिए जरूरी तत्वों को ग्रहों तक पहुंचाने का काम करती हैं।

कैसे बनते हैं ग्रह: बर्फ और धूल का अद्भुत संगम :


ग्रहों का निर्माण एक जटिल और धीमी प्रक्रिया है। जब कोई तारा जन्म लेता है, तो उसके चारों ओर गैस और धूल का एक घेरा बन जाता है। अगर इस धूल पर बर्फ की परत चढ़ी हो, तो ये कण आपस में चिपक जाते हैं और धीरे-धीरे छोटे-छोटे टुकड़ों से ग्रहों का निर्माण शुरू हो जाता है। नासा की नई खोज इस प्रक्रिया को बेहतर समझने में मदद करती है। अब वैज्ञानिक जान पाएंगे कि किस प्रकार की बर्फ और गैसें ग्रहों के निर्माण के लिए सबसे उपयुक्त होती हैं।

जीवन के संकेत: क्या हम एलियंस से मिल सकते हैं? :


नासा के इस मिशन से यह तो साबित हो गया है कि ब्रह्मांड में जीवन के निर्माण के लिए जरूरी तत्व मौजूद हैं, लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि हम किसी अन्य सभ्यता से मिल सकते हैं? फिलहाल, हम एलियंस के मिलने के करीब नहीं हैं, लेकिन इस मिशन के द्वारा जुटाई गई जानकारी भविष्य में इस सवाल का जवाब ढूंढने में मदद कर सकती है। वैज्ञानिक अब इस डेटा का अध्ययन कर रहे हैं, ताकि यह समझ सकें कि जीवन के लिए कौन से ग्रह सबसे उपयुक्त हैं और वहां जीवन की संभावना कितनी है।

संजय सक्सैना - अंतरिक्ष के ठंडे इलाकों में जीवन की तलाश :


नासा का यह SPHEREx मिशन हमें यह सिखाता है कि अंतरिक्ष की शांति और ठंडक में जीवन की संभावनाएं छिपी हो सकती हैं। हम जो बर्फीले क्षेत्रों को देख रहे हैं, वे भविष्य में जीवन को जन्म देने के स्रोत हो सकते हैं। इन बर्फीले बादलों में मौजूद तत्व हमें यह समझने में मदद करेंगे कि जीवन का जन्म किस प्रकार हुआ होगा और भविष्य में किस तरह से नए ग्रहों पर जीवन संभव हो सकता है।

यह खोज ब्रह्मांड के बारे में हमारी समझ को नई दिशा देती है और यह निश्चित रूप से भविष्य में होने वाली खगोलशास्त्र की रिसर्च के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी।

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