सौरव दास ने कहा कि यह आदेश 25 जुलाई 2026 को भारत सरकार द्वारा युवाओं को दिए गए उस सार्वजनिक आश्वासन के विपरीत प्रतीत होता है, जिसमें कहा गया था कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ली जाएंगी और शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल किसी भी व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निशाना नहीं बनाया जाएगा।
उन्होंने दावा किया कि इसी सरकारी आश्वासन पर भरोसा करते हुए और सद्भावना के आधार पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपना देशव्यापी आंदोलन स्थगित किया था।
प्रवक्ता ने आशंका व्यक्त की कि अब भारत सरकार और भाजपा शासित राज्य सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम आदेश का हवाला देकर व्यक्तिगत प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को जारी रख सकते हैं और उन्हें कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। उनके अनुसार, आंदोलन की शुरुआत से ही यह चिंता थी कि शांतिपूर्ण असहमति व्यक्त करने वालों को राजनीतिक रूप से निशाना बनाने के लिए न्यायिक प्रक्रियाओं का अप्रत्यक्ष रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है।
सौरव दास ने यह भी कहा कि उन्हें इस बात पर आश्चर्य है कि सरकार के वकीलों ने अदालत के समक्ष यह नहीं बताया कि **25 जुलाई को सरकार और CJP के बीच एक सहमति बनी थी** तथा बातचीत देर रात तक जारी रही थी। उनका कहना है कि यदि अदालत के समक्ष यह जानकारी रखी जाती तो अंतरिम आदेश अलग हो सकता था।
उन्होंने कहा कि हजारों छात्रों और युवाओं से किया गया सार्वजनिक वादा बाद की कानूनी प्रक्रियाओं के कारण कमजोर या निष्प्रभावी नहीं होना चाहिए। ऐसा होने से जनता का विश्वास टूटता है।
CJP प्रवक्ता ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश में कहीं भी सरकार को एफआईआर जारी रखने के लिए बाध्य नहीं किया गया है। उनके अनुसार, केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकारों के पास अब भी मामलों को वापस लेने या शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का अधिकार है, जैसा कि **बिहार और असम सरकारों** द्वारा किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सरकार अदालत के आदेश का हवाला देकर अपने वादे से पीछे हटती है, तो यह आदेश की गलत व्याख्या होगी।
सौरव दास ने मांग की कि केंद्र सरकार और संबंधित भाजपा/एनडीए शासित राज्य सरकारें 25 जुलाई को दिए गए आश्वासन का पूरा विवरण सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करें, ताकि अदालत के समक्ष सभी तथ्य स्पष्ट रूप से रखे जा सकें और भविष्य में पूरी जानकारी के आधार पर निर्णय लिया जा सके।
उन्होंने कहा कि देश के युवाओं ने सरकार के आश्वासन पर विश्वास करते हुए आंदोलन समाप्त किया था और उस विश्वास को टूटने नहीं दिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, संवैधानिक संस्थाओं का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए उपयोग नहीं होना चाहिए।
CJP ने सरकार से मांग दोहराई कि वह अपने सभी वादों को तत्काल पूरा करे, जिनमें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेना, भविष्य में किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई न करना तथा 25 जुलाई को दिए गए आश्वासन की भावना और शब्द दोनों का पालन करना शामिल है।
सौरव दास ने चेतावनी दी कि यदि सरकार अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं करती है तो कॉकरोच जनता पार्टी देशभर में अपना आंदोलन दोबारा शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों और युवाओं ने देश के भविष्य के लिए आवाज उठाई है, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और यदि सरकार अपने वादे से पीछे हटती है तो देश के युवा एक बार फिर सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे।