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Wednesday, May 20, 2026

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राजस्थान की युवा कवयित्री मेघना वीरवाल की कविता “तपती धूप” में जीवन की बेचैनी, शांति की खोज और आत्मिक सुकून का मार्मिक चित्रण
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के आकोला क्षेत्र के गाडरियावास की निवासी युवा कवयित्री मेघना वीरवाल द्वारा लिखी गई कविता “तपती धूप” इन दिनों साहित्य प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन रही है। यह कविता केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि आधुनिक जीवन की भागदौड़, मानसिक थकान और आत्मिक शांति की तलाश को बेहद संवेदनशील तरीके से अभिव्यक्त करती है।

कला-साहित्य / तपती धूप में सुकून की तलाश: मेघना वीरवाल की कविता ने जीवन संघर्ष और आशा का दिया गहरा संदेश

कविता में कवयित्री ने “तपती धूप” को जीवन की कठिनाइयों और संघर्षों का प्रतीक बताया है, जबकि “छांव” को सुकून, प्रेम, आत्मिक शांति और सुरक्षा के रूप में प्रस्तुत किया गया है। कविता का प्रत्येक भाव पाठक को भीतर तक छूने का सामर्थ्य रखता है।

जीवन की वास्तविकता को दर्शाती कविता :


“तपती धूप” कविता का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य जीवनभर शांति और अपनापन खोजता रहता है। बाहरी दुनिया की कठोर परिस्थितियों के बीच हर व्यक्ति ऐसी छांव चाहता है, जहां उसे मानसिक सुकून और आत्मिक शांति मिल सके।

कवयित्री ने कविता में यह भी दर्शाया है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद आशा का दीपक बुझना नहीं चाहिए। “आशा की लौ हाथ में लिए” जैसी पंक्तियां सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास का संदेश देती हैं।

कविता | तपती धूप :


छांव ढूंढने निकला हूँ
पूर्ण छांव
जहां पवित्रता की महक हो
जहां शान्ति इतनी कि
मेरे शरीर को चीरती हुई
मेरी आत्मा के भीतर बसे
एक नन्हें बालक सा मन मेरा
सुकून से गदगद हो उठे

मैं नहीं देखना चाहता
इस तपती धूप को
मैं नहीं पहचानता
किसी मौसम को
मेरे लिए सारे मौसम
एक समान है
मैं फिर भी
निकल जाना चाहता हूं
आशावादी बन
आशा की लौ हाथ में लिए
जहां खड़ा तो हूं
मैं अपने साथ

फिर भी
उस छांव की तलाश जारी है
जिस तपती धूप में
एक विशाल दरख़्त
की शाखाएं हमारे
बदन को जैसे ठंडक देती है
और सुला देती हैं
अपनी घनघोर छाया में
और भर देती हमारे अंदर
सुकून का अहसास
जिसकी तलाश में
हम सदैव भटकते रहते

साहित्य प्रेमियों को पसंद आ रही रचना :


कविता की भाषा सरल होने के बावजूद उसके भाव अत्यंत गहरे हैं। यही कारण है कि यह रचना युवाओं और साहित्य प्रेमियों को विशेष रूप से प्रभावित कर रही है। कविता में प्रयुक्त “धूप” और “छांव” जैसे प्रतीक जीवन के संघर्ष और राहत को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हैं।

मानना है कि ऐसी कविताएं वर्तमान समय में मानसिक शांति, आत्ममंथन और मानवीय संवेदनाओं की आवश्यकता को उजागर करती हैं।

आशा और आत्मबल का संदेश :


“तपती धूप” केवल संघर्ष का चित्रण नहीं करती, बल्कि यह बताती है कि कठिन समय में भी व्यक्ति को उम्मीद और सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ना चाहिए। कविता का अंतिम भाव यह स्पष्ट करता है कि मनुष्य जीवनभर उस सुकून की तलाश करता रहता है, जो उसे भीतर से संतुष्टि दे सके।

यह कविता पाठकों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करती है और जीवन की वास्तविकताओं को संवेदनशीलता के साथ सामने लाती है।

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