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Friday, April 24, 2026

News Desk / News Delhi /April 24, 2026

राजनीति में विचारधारा से ऊपर जब 'परिवारवाद' और 'स्वार्थ' हावी होता है, तो नैतिकता के मायने बदल जाते हैं। डॉ. मधुकांत की लघुकथा 'अपना राज' राजनीतिक परिवारों के उस पर्दे के पीछे के सच को उजागर करती है, जहाँ दुश्मन सिर्फ जनता के सामने बना जाता है।

कला-साहित्य / सत्ता का 'मास्टरप्लान': नेता ख्यालीराम ने बताया कैसे हर सरकार में बना रहे परिवार का दबदबा

कहानी: अपना राज

वरिष्ठ नेता ख्याली राम ने अपने परिवार की एक गुप्त बैठक बुलाई। बैठक में उनके चार बेटे, बहुएं, बेटियां, दामाद और पोते-पोतियों समेत कुल 21 सदस्य शामिल हुए। चर्चा का मुख्य विषय था—आगामी चुनाव और सत्ता पर पकड़।

बड़े बेटे ने प्रस्ताव रखा, "हमें पूरी ताकत एक ही पार्टी पर लगानी चाहिए, ताकि हमारा कोई एक सदस्य चुनाव जीत सके।" बैठक में मौजूद अन्य सदस्यों ने भी अपने-अपने सुझाव दिए।

अंत में, अनुभवी नेता ख्याली राम ने अपना 'मास्टरप्लान' साझा किया। उन्होंने समझाया, "हमें एक पार्टी के भरोसे नहीं रहना चाहिए। परिवार के सदस्यों को अलग-अलग चार प्रमुख पार्टियों में शामिल होना चाहिए। जनता का मूड बदलता रहता है और नई सरकार पुरानी सरकार से बदला लेने की कोशिश करती है। अगर हम हर पार्टी में रहेंगे, तो हमारा परिवार हमेशा सुरक्षित रहेगा।"

उन्होंने आगे मूल मंत्र देते हुए कहा, "दिखावे के लिए हमें जनता के सामने एक-दूसरे की आलोचना करनी होगी, एक-दूसरे को गालियां देनी होंगी और लड़ना भी पड़ेगा। लेकिन अंदर से हमें एक रहना है। पार्टी चाहे किसी की भी आए, सत्ता की चाबी हमारे ही परिवार के पास रहनी चाहिए।"

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