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Tuesday, October 20, 2026

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जेजेरो क्रेटर की 185 से अधिक चट्टानी सतहों का अध्ययन; भूजल, प्राचीन झील और संभावित भूमिगत गर्म जल गतिविधियों के मिले रासायनिक संकेत

वॉशिंगटन। मंगल ग्रह पर कभी पानी मौजूद था या नहीं, यह सवाल लंबे समय से वैज्ञानिकों के शोध का केंद्र रहा है। अब अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के पर्सिवरेंस रोवर द्वारा किए गए चट्टानों के अध्ययन से लाल ग्रह के प्राचीन जल इतिहास की नई तस्वीर सामने आई है। मंगल के जेजेरो क्रेटर के मार्जिन यूनिट क्षेत्र में मिली चट्टानों में कम से कम तीन अलग-अलग चरणों में पानी के साथ हुई रासायनिक प्रतिक्रियाओं के संकेत दर्ज किए गए हैं। यह खोज मंगल पर प्राचीन पर्यावरण और वहां कभी सूक्ष्मजीवी जीवन के अनुकूल परिस्थितियां होने की संभावना को समझने में मदद कर सकती है।

विज्ञान / मंगल ग्रह पर तीन अलग-अलग दौर में पानी के मिले संकेत, NASA के पर्सिवरेंस रोवर ने खोले अतीत के राज - संजय सक्सैना | वरिष्ठ विश्लेषक एवं विचारक

जिस क्षेत्र में तलछटी चट्टानों की उम्मीद थी, वहां मिलीं आग्नेय चट्टानें


वैज्ञानिक लंबे समय से जेजेरो क्रेटर के मार्जिन यूनिट क्षेत्र का अध्ययन कर रहे हैं। मंगल की कक्षा में मौजूद अंतरिक्ष यानों से यहां कार्बोनेट खनिजों के संकेत मिले थे। इसी आधार पर वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि इस क्षेत्र में पानी की मौजूदगी से जुड़ी तलछटी चट्टानें मिल सकती हैं।

हालांकि, पर्सिवरेंस रोवर के अध्ययन में मुख्य रूप से आग्नेय चट्टानें सामने आईं। ये चट्टानें प्राचीन मैग्मा के ठंडा होकर जमने से बनी थीं। खास बात यह रही कि इन चट्टानों में पानी के संपर्क से हुई रासायनिक प्रतिक्रियाओं के निशान सुरक्षित मिले, जो मंगल के भूवैज्ञानिक इतिहास को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

185 से अधिक चट्टानी सतहों का किया गया विश्लेषण


पर्सिवरेंस रोवर में लगे SuperCam उपकरण की मदद से 185 से अधिक चट्टानी सतहों का रासायनिक अध्ययन किया गया। लेजर आधारित तकनीक से जुटाए गए आंकड़ों ने संकेत दिया कि इन चट्टानों का अलग-अलग समय पर पानी से संपर्क हुआ था।

वैज्ञानिकों ने इन संकेतों को तीन प्रमुख चरणों में समझने की कोशिश की है।

पहला चरण: भूजल के संपर्क से बदली चट्टानों की संरचना


चट्टानों के निचले हिस्सों में ओलिविन खनिज के कुछ दाने परिवर्तित अवस्था में मिले। इसके साथ ही सिलिका की मौजूदगी भी दर्ज की गई। वैज्ञानिकों के अनुसार, कार्बन डाइऑक्साइड से समृद्ध भूजल के चट्टानों से गुजरने पर रासायनिक प्रतिक्रियाएं हुई होंगी। इन प्रक्रियाओं ने चट्टानों की संरचना को बदला और कार्बोनेट खनिजों से जुड़ी दरारों के निर्माण में भूमिका निभाई होगी।

ये संकेत बताते हैं कि मंगल की सतह के नीचे मौजूद पानी ने भी उसके भूवैज्ञानिक विकास को प्रभावित किया हो सकता है।

दूसरा चरण: प्राचीन झील के पानी से जुड़ी गतिविधियां


दूसरे चरण के संकेत जेजेरो क्रेटर में कभी मौजूद रही प्राचीन झील से जुड़े माने जा रहे हैं। वैज्ञानिकों को झील के पानी के नीचे स्थित क्षेत्रों की चट्टानों में सिलिका से संबंधित रासायनिक बदलाव मिले।

इन संकेतों से पता चलता है कि उस दौर में सतही जल और चट्टानों के बीच महत्वपूर्ण रासायनिक संपर्क हुआ होगा। जेजेरो क्रेटर में प्राचीन झील के अस्तित्व के प्रमाण पहले से ही वैज्ञानिकों के अध्ययन का हिस्सा रहे हैं। नई जानकारी उस क्षेत्र में पानी की गतिविधियों को अधिक विस्तार से समझने में सहायक हो सकती है।

तीसरा चरण: क्या मंगल की सतह के नीचे गर्म पानी भी मौजूद था?


अध्ययन का एक और महत्वपूर्ण पहलू मार्जिन यूनिट के पूर्वी हिस्से में मिली खनिज शिराएं हैं। इनमें कैल्शियम सल्फेट और फ्लोराइट जैसे खनिजों की मौजूदगी दर्ज की गई।

फ्लोराइट कुछ परिस्थितियों में गर्म भूजल से जुड़ी भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं के दौरान बन सकता है। इसलिए इन खनिजों की मौजूदगी मंगल के अतीत में भूमिगत हाइड्रोथर्मल गतिविधियों की संभावना की ओर संकेत करती है।

यदि आगे के अध्ययन से इसकी पुष्टि होती है, तो यह समझने में मदद मिलेगी कि मंगल पर पानी केवल सतह या झीलों तक सीमित नहीं था, बल्कि कुछ क्षेत्रों में भूमिगत गर्म जल प्रणालियां भी सक्रिय रही हो सकती थीं।

मंगल पर जीवन की संभावना से क्या है इस खोज का संबंध?


इस खोज का महत्व केवल पानी की मौजूदगी के प्रमाणों तक सीमित नहीं है। पृथ्वी पर पानी, खनिजों और चट्टानों के बीच होने वाली रासायनिक प्रक्रियाएं सूक्ष्मजीवी जीवन के अनुकूल वातावरण तैयार करने में भूमिका निभा सकती हैं।

कार्बोनेट जैसे कुछ खनिज प्राचीन पर्यावरण की परिस्थितियों को लंबे समय तक संरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं। इस कारण मंगल पर ऐसे खनिजों और चट्टानों का अध्ययन वैज्ञानिकों के लिए खास महत्व रखता है।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि पानी के रासायनिक संकेत मिलने का अर्थ मंगल पर जीवन की खोज हो जाना नहीं है। फिलहाल वैज्ञानिक यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि लाल ग्रह के अतीत में पानी कब और किस रूप में मौजूद था तथा क्या उस समय वहां जीवन के लिए आवश्यक परिस्थितियां विकसित हुई थीं।

पृथ्वी पर आने वाले चट्टानी नमूनों से मिल सकते हैं अहम जवाब


पर्सिवरेंस रोवर मंगल की चट्टानों और मिट्टी के नमूने एकत्र कर रहा है। भविष्य में यदि इन नमूनों को पृथ्वी पर लाकर अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में जांचने की योजना सफल होती है, तो वैज्ञानिक उनकी रासायनिक और खनिज संरचना का अधिक विस्तृत विश्लेषण कर सकेंगे।

ऐसे अध्ययन से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि मंगल पर पानी की अलग-अलग गतिविधियां कब हुईं, उनका तापमान कैसा रहा और उन्होंने चट्टानों को किस तरह प्रभावित किया। इन नमूनों में प्राचीन पर्यावरण और संभावित जैविक संकेतों से जुड़ी जानकारी भी तलाश की जा सकती है।

लाल ग्रह के अतीत को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम


पर्सिवरेंस रोवर के अध्ययन से मंगल के भूवैज्ञानिक इतिहास की जटिलता सामने आती है। चट्टानों में दर्ज पानी से संबंधित रासायनिक बदलाव इस संभावना को मजबूत करते हैं कि लाल ग्रह पर अलग-अलग समय में विभिन्न प्रकार की जल गतिविधियां हुई थीं।

भूजल, प्राचीन झील और संभावित भूमिगत गर्म जल प्रणालियों से जुड़े संकेत मंगल के विकास को समझने के लिए नए रास्ते खोलते हैं। हालांकि, वहां जीवन की मौजूदगी का सवाल अभी अनुत्तरित है। आने वाले अध्ययनों और चट्टानी नमूनों के विस्तृत विश्लेषण से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मंगल का अतीत कितना अनुकूल था और क्या कभी वहां जीवन पनपने की परिस्थितियां बनी थीं।

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