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Monday, July 27, 2026

News Desk / News Delhi /July 27, 2026

20 जुलाई को CJP (Cockroach Janta Party) के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए कथित लाठीचार्ज और बल प्रयोग के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यसभा सांसद मनोज झा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए मामले को 28 जुलाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

देश / सुप्रीम कोर्ट ने CJP लाठीचार्ज मामले की सुनवाई को दी मंजूरी, कहा- शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर नहीं हो सकता लाठीचार्ज

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किए जाने पर कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में रहकर विरोध प्रदर्शन करना संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार है।

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियां


सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यदि कोई प्रदर्शन शांतिपूर्ण है तो केवल प्रदर्शन करने के आधार पर लोगों पर लाठीचार्ज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि पुलिस द्वारा आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया गया है, तो उसकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि बल प्रयोग की हर घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और ऐसे मामलों के लिए पूरे देश में एक समान प्रोटोकॉल होना आवश्यक है, ताकि कानून व्यवस्था और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन बना रहे।

क्या है पूरा मामला?


20 जुलाई को CJP द्वारा जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला गया था। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे समेत कई मांगों को लेकर मार्च कर रहे थे। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कथित तौर पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।

प्रदर्शन के बाद कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें छात्रों और प्रदर्शनकारियों के घायल होने के दावे किए गए। इन्हीं घटनाओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई।

पहले तत्काल सुनवाई से किया था इनकार


22 जुलाई को वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए कथित लाठीचार्ज के वीडियो अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने की अनुमति मांगी थी। उस समय मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी को लेकर विवाद हुआ था। बाद में न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि उनके बयान को संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किया गया और सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे प्रत्येक नागरिक के लिए खुले हैं।

अब अदालत ने मामले की नियमित सुनवाई के लिए सहमति दे दी है और अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।

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