Tranding
Friday, July 3, 2026

News Desk / News Delhi /July 2, 2026

कल्पना कीजिए कि आप सुबह उठते ही अपने कंप्यूटर पर दुनिया भर का विशाल डेटा कुछ ही सेकंड में डाउनलोड कर लें। वीडियो कॉल में कभी आवाज न अटके, 8K वीडियो बिना बफरिंग के चलें और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कुछ ही पलों में अरबों सूचनाओं का विश्लेषण कर दे। कुछ साल पहले तक यह सब कल्पना जैसा लगता था, लेकिन अब यह भविष्य धीरे-धीरे हकीकत बनता दिखाई दे रहा है। आइए जानते हैं, संजय सक्सेना, वरिष्ठ विश्लेषक और विचारक, के इस लेख के माध्यम से।

Representative Image
टेक्नोलॉजी / चीन की खोखली फाइबर केबल ने रचा इतिहास! 51.3 टेराबिट प्रति सेकंड की रफ्तार से बदल सकता है इंटरनेट का भविष्य - संजय सक्सैना

चीन ने इंटरनेट तकनीक के क्षेत्र में एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने दुनिया के वैज्ञानिकों और दूरसंचार उद्योग का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। चीन के वैज्ञानिकों और टेलीकॉम इंजीनियरों ने एक नई Hollow-Core Fiber (खोखली फाइबर) तकनीक का सफल परीक्षण किया है। इस परीक्षण में लगभग 206.5 किलोमीटर (128 मील) की दूरी तक बिना किसी सिग्नल रिपीटर के 51.3 टेराबिट प्रति सेकंड (Tbps) की डेटा ट्रांसमिशन क्षमता हासिल की गई। तकनीकी वेबसाइट Tom's Hardware और उद्योग से जुड़ी कई रिपोर्टों के अनुसार इसे भविष्य के हाई-स्पीड इंटरनेट की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

आखिर क्या है Hollow-Core Fiber?


आज दुनिया में इंटरनेट चलाने के लिए ज्यादातर जगहों पर ऑप्टिकल फाइबर केबल का इस्तेमाल होता है। इन केबलों के अंदर बेहद पतले कांच के तार होते हैं, जिनमें लेजर लाइट के रूप में डेटा भेजा जाता है।

लेकिन वैज्ञानिकों ने सोचा कि जब प्रकाश हवा में कांच की तुलना में ज्यादा तेजी से चलता है, तो डेटा को कांच के बजाय हवा से क्यों न भेजा जाए?
इसी सोच से जन्म हुआ Hollow-Core Fiber तकनीक का।

इस तकनीक में फाइबर का बीच वाला हिस्सा ठोस कांच से भरा नहीं होता, बल्कि उसके अंदर एक बेहद पतला खोखला मार्ग बनाया जाता है। इसी रास्ते से प्रकाश आगे बढ़ता है। चूंकि प्रकाश का अधिकांश हिस्सा हवा में यात्रा करता है, इसलिए सिग्नल को कम रुकावट मिलती है और डेटा पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से अपनी मंजिल तक पहुंच जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य के इंटरनेट बैकबोन नेटवर्क के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।

इस उपलब्धि के पीछे कौन-कौन हैं?


उद्योग रिपोर्टों के अनुसार
इस परियोजना में चीन की प्रमुख दूरसंचार कंपनी China Telecom, दुनिया की बड़ी ऑप्टिकल फाइबर निर्माता Yangtze Optical Fibre and Cable Joint Stock Limited (YOFC) तथा नेटवर्क समाधान विकसित करने वाली कंपनी Dekoli ने मिलकर काम किया। इन संस्थाओं ने मिलकर दुनिया की सबसे लंबी व्यावसायिक Hollow-Core Fiber लिंक पर सफल परीक्षण किया।

रिपोर्टों के मुताबिक इस परियोजना में चीन के ऑप्टिकल फाइबर अनुसंधान से जुड़े कई वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने वर्षों तक काम किया। उनका उद्देश्य केवल तेज इंटरनेट बनाना नहीं था, बल्कि ऐसी तकनीक विकसित करना था जो आने वाले AI युग की जरूरतों को भी पूरा कर सके।


51.3 टेराबिट प्रति सेकंड आखिर कितना तेज है?


यह आंकड़ा सुनने में जितना बड़ा लगता है, असल में उससे भी कहीं ज्यादा विशाल है।

इसे आसान उदाहरण से समझिए।
यदि किसी घर का इंटरनेट कनेक्शन 100 Mbps है, तो 51.3 Tbps उससे लाखों गुना अधिक क्षमता वाला नेटवर्क बैकबोन है।

एक और उदाहरण लेते हैं।
मान लीजिए किसी 4K फिल्म का आकार लगभग 25 GB है। इतनी क्षमता वाले नेटवर्क पर सैद्धांतिक रूप से हजारों 4K फिल्में कुछ ही सेकंड में ट्रांसफर की जा सकती हैं।
अगर किसी बड़े क्लाउड डेटा सेंटर को लाखों लोगों की फाइलें एक साथ भेजनी हों, तो यह तकनीक वर्तमान नेटवर्क की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी साबित हो सकती है।
ध्यान देने वाली बात यह भी है कि 51.3 Tbps किसी एक व्यक्ति के घर की इंटरनेट स्पीड नहीं है। यह पूरे नेटवर्क की डेटा वहन क्षमता (Bandwidth Capacity) को दर्शाता है।


बिना रिपीटर के लंबी दूरी तय करना क्यों है बड़ी बात?


सामान्य ऑप्टिकल फाइबर में जब डेटा लंबी दूरी तय करता है तो सिग्नल धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। इसलिए बीच-बीच में रिपीटर या एम्पलीफायर लगाए जाते हैं, जो सिग्नल को दोबारा मजबूत करते हैं।

लेकिन चीन के इस परीक्षण में लगभग 206 किलोमीटर तक बिना सिग्नल रीजनरेशन के डेटा सफलतापूर्वक भेजा गया।

विशेषज्ञों के अनुसार यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे भविष्य में नेटवर्क का रखरखाव आसान हो सकता है, ऊर्जा की बचत हो सकती है और लंबे नेटवर्क मार्गों की लागत भी कम हो सकती है।

केवल केबल नहीं, पूरी तकनीक बदली गई


Tom's Hardware की रिपोर्ट के अनुसार इस परीक्षण में केवल नई फाइबर केबल का इस्तेमाल ही नहीं किया गया, बल्कि पूरा ऑप्टिकल ट्रांसमिशन सिस्टम भी आधुनिक बनाया गया।

इस नेटवर्क में ऐसी स्मार्ट तकनीक का उपयोग किया गया जो अलग-अलग वेवलेंथ पर डेटा की गति और सिग्नल की शक्ति को अपने-आप नियंत्रित करती है। इसका फायदा यह हुआ कि पूरे नेटवर्क में डेटा संतुलित तरीके से चलता रहा और किसी भी चैनल पर प्रदर्शन खराब नहीं हुआ। यही वजह है कि इसे भविष्य के AI नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

AI, क्लाउड और 6G के लिए क्यों जरूरी है यह तकनीक?


आज दुनिया तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ओर बढ़ रही है। ChatGPT जैसे बड़े भाषा मॉडल हों, सेल्फ-ड्राइविंग कारें हों या मेडिकल रिसर्च में इस्तेमाल होने वाले सुपरकंप्यूटर—इन सभी को हर सेकंड भारी मात्रा में डेटा भेजने और प्राप्त करने की जरूरत होती है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी AI डेटा सेंटर में हजारों ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) एक साथ काम कर रही हों, तो उनके बीच हर पल विशाल मात्रा में डेटा का आदान-प्रदान होता है। अगर नेटवर्क धीमा हो जाए तो सबसे शक्तिशाली कंप्यूटर भी अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाएंगे।

यही वजह है कि Hollow-Core Fiber जैसी तकनीक को AI युग की रीढ़ माना जा रहा है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार कम लेटेंसी (Latency) और अधिक डेटा क्षमता वाले नेटवर्क भविष्य में AI, मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्यूटिंग और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC) को नई गति देंगे।

इसी तरह, आने वाले वर्षों में 6G मोबाइल नेटवर्क पर भी दुनिया भर में शोध चल रहा है। 6G में केवल तेज इंटरनेट ही नहीं, बल्कि रियल-टाइम होलोग्राम, स्मार्ट फैक्ट्री, दूरस्थ रोबोटिक सर्जरी और लाखों IoT डिवाइसों को एक साथ जोड़ने जैसी सेवाओं की कल्पना की जा रही है। ऐसे नेटवर्क के लिए बेहद तेज और कम विलंबता वाले फाइबर बैकबोन की जरूरत होगी।

सुरक्षा का भी रखा गया पूरा ध्यान


इतनी हाई-स्पीड तकनीक में केवल गति ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी होती है।

रिपोर्टों के अनुसार इस परीक्षण में हाई-पावर ऑप्टिकल एम्पलीफायर का उपयोग किया गया, जो लंबे समय तक सिग्नल को मजबूत बनाए रखता है। इसके साथ एक ऑटोमैटिक इंटरलॉक सिस्टम भी लगाया गया है। यदि किसी कारण से नेटवर्क में असामान्य स्थिति पैदा होती है, लेजर पावर अचानक बढ़ जाती है या उपकरणों में खराबी आने लगती है, तो यह सिस्टम स्वतः काम रोक देता है और अलार्म सक्रिय कर देता है। इससे महंगे नेटवर्क उपकरण सुरक्षित रहते हैं और पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता बढ़ती है।

क्या इससे आम लोगों का इंटरनेट तुरंत तेज हो जाएगा?


इस सवाल का जवाब है—अभी नहीं।
यह तकनीक फिलहाल इंटरनेट की मुख्य बैकबोन लाइन और बड़े डेटा सेंटरों के लिए विकसित की जा रही है। यानी इसका सीधा असर सबसे पहले उन नेटवर्कों पर पड़ेगा जो शहरों, देशों और महाद्वीपों के बीच डेटा पहुंचाते हैं।

हालांकि जैसे-जैसे यह तकनीक सस्ती होगी, भविष्य में इसका फायदा आम इंटरनेट उपभोक्ताओं तक भी पहुंच सकता है। जिस तरह कभी फाइबर ब्रॉडबैंड केवल बड़े शहरों तक सीमित था और आज छोटे शहरों तक पहुंच चुका है, उसी तरह Hollow-Core Fiber भी आने वाले वर्षों में व्यापक रूप से अपनाई जा सकती है।

भारत के लिए क्या मायने हैं?


भारत दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट बाजारों में शामिल है। देश में करोड़ों लोग ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल भुगतान, वीडियो स्ट्रीमिंग, गेमिंग, क्लाउड सेवाओं और AI आधारित एप्लिकेशन का उपयोग कर रहे हैं।

ऐसे में यदि भविष्य में Hollow-Core Fiber जैसी तकनीक व्यावसायिक रूप से सफल होती है, तो भारतीय दूरसंचार कंपनियां भी इसे अपनाने पर विचार कर सकती हैं। इससे बड़े डेटा सेंटर, वित्तीय संस्थान, अनुसंधान केंद्र, रक्षा संचार नेटवर्क और क्लाउड सेवा प्रदाताओं को काफी लाभ मिल सकता है।

भारत पहले से ही राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क और डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य में नई पीढ़ी की फाइबर तकनीक देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत बना सकती है।

अभी कौन-कौन सी चुनौतियाँ बाकी हैं?


हालांकि यह उपलब्धि बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन Hollow-Core Fiber अभी शुरुआती व्यावसायिक चरण में है।

सबसे बड़ी चुनौती इसका उत्पादन है। ऐसी केबल बनाना पारंपरिक ऑप्टिकल फाइबर की तुलना में कहीं अधिक जटिल और महंगा है। इसके अलावा इन्हें बड़े पैमाने पर बिछाने के लिए नए उपकरणों और विशेष तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत होगी।

इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि नई तकनीक पुराने नेटवर्क उपकरणों के साथ आसानी से काम कर सके। यदि ऐसा नहीं हुआ तो नेटवर्क अपग्रेड की लागत काफी बढ़ सकती है।

भविष्य की इंटरनेट क्रांति की ओर एक बड़ा कदम


दुनिया में हर साल इंटरनेट ट्रैफिक तेजी से बढ़ रहा है। AI, क्लाउड कंप्यूटिंग, स्मार्ट शहर, स्वचालित वाहन और अरबों इंटरनेट डिवाइस आने वाले वर्षों में डेटा की मांग को कई गुना बढ़ा देंगे।

ऐसे समय में केवल तेज मोबाइल नेटवर्क बनाना काफी नहीं होगा। डेटा को एक शहर से दूसरे शहर और एक देश से दूसरे देश तक पहुंचाने वाले नेटवर्क को भी उतना ही शक्तिशाली बनाना होगा।
यही कारण है कि विशेषज्ञ Hollow-Core Fiber को इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर की अगली पीढ़ी मान रहे हैं।

संजय सक्सैना वरिष्ठ विश्लेषक एवं विचारक -


चीन द्वारा 51.3 टेराबिट प्रति सेकंड की क्षमता के साथ Hollow-Core Fiber का सफल परीक्षण केवल एक नया स्पीड रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि यह भविष्य की इंटरनेट तकनीक की दिशा भी दिखाता है। China Telecom, YOFC और अन्य तकनीकी संस्थाओं के सहयोग से किया गया यह प्रयोग बताता है कि आने वाले समय में इंटरनेट केवल तेज नहीं होगा, बल्कि अधिक विश्वसनीय, कम विलंबता वाला और विशाल डेटा क्षमता वाला भी होगा।

हालांकि इस तकनीक को आम लोगों तक पहुंचने में अभी कुछ वर्ष लग सकते हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि इंटरनेट की अगली बड़ी छलांग पारंपरिक कांच की फाइबर से आगे निकलकर हवा के रास्ते डेटा भेजने वाली Hollow-Core Fiber तकनीक के जरिए ही आ सकती है। जिस तरह कभी फाइबर ब्रॉडबैंड ने डायल-अप और कॉपर नेटवर्क की जगह ली थी, उसी तरह भविष्य में Hollow-Core Fiber भी वैश्विक डिजिटल दुनिया का नया मानक बन सकती है। आने वाले वर्षों में यह तकनीक AI, 6G, क्लाउड कंप्यूटिंग और वैश्विक संचार नेटवर्क को पहले से कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

Subscribe

Trending

24 Jobraa Times

भारतीय लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को बनाये रखने व लोकतंत्र को जिंदा रखने के लिए सवंत्रता, समानता, बन्धुत्व व न्याय की निष्पक्ष पत्रकारिता l

Subscribe to Stay Connected

2025 © 24 JOBRAA - TIMES MEDIA & COMMUNICATION PVT. LTD. All Rights Reserved.