CJP ने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण, अनुशासित और लोकतांत्रिक बनाए रखने के लिए प्रतिभागियों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश (Do's and Don'ts) भी जारी किए हैं। संगठन का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं, जवाबदेही की कमी और सुधार की मांग को प्रमुखता से उठाना है।
प्रदर्शनकारियों के लिए जारी किए गए दिशा-निर्देश :
संगठन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों से भारतीय राष्ट्रीय ध्वज और किताब साथ लाने का आग्रह किया गया है। इसके अलावा प्रतिभागियों को पूरे कार्यक्रम की लाइव रिकॉर्डिंग करने, पुलिस और प्रशासन का सहयोग करने तथा पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर हाइड्रेटेड रहने की सलाह दी गई है।
वहीं, संगठन ने कुछ सावधानियां बरतने की भी अपील की है। प्रतिभागियों से अकेले न आने, पुलिसकर्मियों या सुरक्षाकर्मियों पर फूल न फेंकने और सोशल मीडिया या मौके पर मौजूद ट्रोल्स के साथ किसी भी प्रकार की बहस से बचने को कहा गया है।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आंदोलन :
इस संबंध में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP के प्रवक्ताओं सौरव दास, विजेता दहिया और आशुतोष रांका ने कहा कि यह आंदोलन देश की शिक्षा प्रणाली में मौजूद समस्याओं और कथित "सड़ांध" के खिलाफ आवाज उठाने का प्रयास है।
प्रवक्ताओं ने दावा किया कि उनका अभियान शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार की मांग पर केंद्रित है। उन्होंने युवाओं से बड़ी संख्या में आंदोलन का समर्थन करने की अपील करते हुए कहा कि यह पहल किसी राजनीतिक दल, संगठन या राजनीतिक बैनर से जुड़ी नहीं है।
युवाओं से जुड़ने की अपील :
CJP ने अपने संदेश में कहा है कि यह आंदोलन छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सभी लोगों की चिंताओं को सामने लाने का मंच है। संगठन ने देशभर के युवाओं से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।