विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) कैलाश ढाका ने अपने संदेश में कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, नैतिक मूल्यों और नेतृत्व क्षमता का समग्र विकास करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ सामाजिक एवं नैतिक दायित्वों के निर्वहन के लिए प्रेरित किया।
महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. शूरवीर सिंह भाणावत ने विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि "विकसित भारत के लिए विकसित विश्वविद्यालय का होना पूर्व आवश्यकता है।" हमे विकसित विश्वविद्यालय की स्पस्ट राष्ट्रीय रुपरेखा तैयार करनी होगी । ऐसा राष्ट्रीय मानक होना चाहिए जहाँ प्रत्येक स्नातक आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस तथा डेटा फ़्लुएंसी के साथ शिक्षा पूरी करे। उन्होंने यह भी बताया की चीन ने जून २०२६ में अप्रासंगिक हुए १२००० डिग्री प्रोग्राम को विश्वविद्यालयों में बंद करदिये और एआई, रोबोटिक्स सेमीकंडक्टर आदि १०२०० नए प्रोग्राम प्रारम्भ कर दिए। हमे भी ए आई कंटेंट को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना होगा। नए प्रोग्राम उन्होंने महाविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, अनुशासन, परीक्षा प्रणाली, पुस्तकालय, डिजिटल संसाधनों तथा सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यूसीसीएमएस राजस्थान का पहला ऐसा महाविद्यालय है जिसने व्यावहारिक विषयों को प्रभावी रूप से पाठ्यक्रम में शामिल किया है। भविष्य में विज्ञान एवं कला संकाय के विद्यार्थी भी वाणिज्य विषयों का अध्ययन कर सकेंगे, जिससे बहुविषयक शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
मोहनलाल सुखड़िया विश्विद्यालय के डीन पी जी प्रो. के.बी. जोशी समारोह के मुख्य अतिथि ने नियमित अध्ययन, समय प्रबंधन, अनुशासन और नैतिक मूल्यों के महत्व पर बल देते हुए विद्यार्थियों को अपने लक्ष्यों के प्रति समर्पित रहने का संदेश दिया।
प्रथम सत्र में डॉ. शिल्पा वर्डिया ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, क्रेडिट सिस्टम, परीक्षा प्रणाली, आंतरिक मूल्यांकन तथा विषय चयन की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। वहीं डॉ. पारुल दशोरा ने विद्यार्थियों को महाविद्यालय का वर्चुअल टूर कराते हुए विभिन्न विभागों और उपलब्ध सुविधाओं से परिचित कराया।
इस अवसर पर यूसीसीएमएस के सहायक आचार्य डॉ. विनोद मीणा द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) विषय पर लिखित उनकी नवीन पुस्तक का अतिथियों ने विमोचन किया। अतिथियों ने पुस्तक को समयानुकूल एवं विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बताते हुए इसकी सराहना की। अंत में डॉ. देवेंद्र श्रीमाली ने धन्यवाद ज्ञापित किया जिसमें उन्होंने विद्यार्थियों को सही निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया
कार्यक्रम का संचालन डॉ. समता ओड़िया एवं डॉ. हर्षिता ने किया,
इस अवसर पर डॉ. आशा शर्मा, डॉ. रेणु शर्मा, डॉ. विनोद मीणा, डॉ. पुष्पराज मीणा, डॉ. रेखा बेरवा, डॉ. प्रियंका जैन, डॉ. गरिमा कोठारी, डॉ. मनीषा सोलंकी, डॉ. मजबीन, डॉ. लीना गहलोत सहित महाविद्यालय के अनेक संकाय सदस्य उपस्थित रहे। विद्यार्थियों ने कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक बताते हुए इसकी सराहना की।