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Wednesday, May 6, 2026

News Desk / New Delhi /April 26, 2026

दर्द, त्याग और मानवता की अनुपम मिसाल ने रविवार को हरियाणा की धरती पर चिकित्सा क्षेत्र में स्वर्णिम इतिहास रच दिया। पीजीआईएमएस रोहतक के ट्रॉमा सेंटर में सड़क दुर्घटना का शिकार एक 16 वर्षीय किशोर के ब्रेन डेड घोषित होने के बाद उसके शोकाकुल परिवार ने अंगदान का फैसला लिया। इससे एक साथ छह लोगों को नई जिंदगी मिली। सबसे महत्वपूर्ण यह कि हरियाणा में पहली बार किसी अंग (किडनी) को हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट किया गया।

हरियाणा / हरियाणा में चिकित्सा इतिहास का नया अध्याय: 16 वर्षीय ब्रेन डेड किशोर के अंगदान से 6 जिंदगियों को मिली नई रोशनी, राज्य में पहली बार अंगों की एयरलिफ्टिंग सफल

यह उपलब्धि पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रोहतक के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल की निरंतर अंगदान जागरूकता मुहिम का परिणाम है। उन्होंने परिवार को भावुक अपील कर इस महादान के लिए प्रेरित किया। उल्लेखनीय है कि यह पीजीआईएमएस रोहतक में मात्र एक महीने के अंदर तीसरा अंगदान है, लेकिन एयरलिफ्टिंग और पूर्ण समन्वय के कारण यह सबसे ऐतिहासिक और यादगार बन गया।

परिवार का असीम साहस: पिता की मौत के घाव अभी ताजा थे :


गत दिनों सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल 16 वर्षीय युवा को पीजीआईएमएस रोहतक लाया गया था। दुर्भाग्यवश उसके पिता भी उसी हादसे में घायल हुए थे और कुछ दिन पहले उनका निधन हो गया। ब्रेन डेड घोषित होने के बाद परिवार के सामने दुख का पहाड़ टूट पड़ा, फिर भी मां और बड़े भाई ने मानवता की राह चुनी।

कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने खुद परिवार से मुलाकात की और बड़े भाई के कंधे पर हाथ रखकर भावुक अपील की, “आपका बेटा चला गया, लेकिन उसके अंग छह घरों में उम्मीद की किरण बन सकते हैं। वह मरकर भी अमर हो जाएगा।” युवा की मां ने आंसू पोछते हुए कहा, “डॉक्टर साहब, मेरा बेटा दूसरों के काम आ जाए, इससे बड़ा सुकून मेरे लिए कुछ नहीं। हमारा फर्ज है कि हम देश के लिए किसी काम आ जाएं।”

इस प्रकार एक परिवार के त्याग ने पूरे समाज को प्रेरित कर दिया।

अंगों का आवंटन और हरियाणा की पहली एयरलिफ्टिंग :


नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTTO) की गाइडलाइंस के तहत अंगों का आवंटन किया गया:•
लिवर: इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर एंड बिलियरी साइंसेज (ILBS), नई दिल्ली को भेजा गया, जहां दो मरीजों को नई जिंदगी मिलेगी।
एक किडनी: पीजीआईएमएस रोहतक में ही एक जरूरतमंद मरीज को प्रत्यारोपित की गई।
दूसरी किडनी: भारतीय सेना के कमांड हॉस्पिटल, चंडीमंदिर को आवंटित की गई। हरियाणा में पहली बार इस किडनी को हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट किया गया।
दोनों कॉर्निया: पीजीआईएमएस रोहतक में दो नेत्रहीन व्यक्तियों को दृष्टि मिलने की संभावना।

एयरलिफ्टिंग की विस्तृत प्रक्रिया: रविवार सुबह 9:30 बजे चंडीमंदिर से सेना की विशेष डॉक्टर टीम हेलीकॉप्टर लेकर बाबा मस्तनाथ यूनिवर्सिटी (अस्थल बोहर) के हेलीपैड पहुंची। पीजीआईएमएस से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर किडनी को हेलीपैड पहुंचाया गया। दोपहर 3 बजे हेलीकॉप्टर किडनी लेकर वापस चंडीमंदिर रवाना हुआ। इस पूरे ऑपरेशन में हर मिनट कीमती था, क्योंकि किडनी को 6-8 घंटे के अंदर प्रत्यारोपित करना जरूरी होता है।

थलसेना कमांडर (पश्चिमी कमान) ने इस अभियान में शामिल सभी कर्मियों की विशेष सराहना की। कर्नल अनुराग की टीम ने हेलीकॉप्टर ऑपरेशन का नेतृत्व किया। कर्नल अनुराग ने बताया कि वेस्टर्न कमांड के आर्मी कमांडर और रोहतक के कमिश्नर श्री राजीव रतन के त्वरित सहयोग से मात्र कुछ मिनटों में एयरलिफ्ट की अनुमति मिली, जिससे एक सैनिक की जान बचाई जा सकी। उन्होंने कहा, “राष्ट्र प्रथम, सदैव प्रथम के आदर्श के अनुरूप सेना चिकित्सा आपातकाल में हर संभव सहायता प्रदान करती रहेगी।”

रोहतक पुलिस का सराहनीय योगदान: तीसरी बार सफल ग्रीन कॉरिडोर


रोहतक पुलिस ने तीसरी बार दो ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अंगों के सुरक्षित परिवहन में अहम भूमिका निभाई। पुलिस अधीक्षक श्री गौरव राजपुरोहित के मार्गदर्शन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री आयुष यादव के नेतृत्व में 150 से अधिक पुलिसकर्मियों ने ट्रैफिक मैनेजमेंट किया। ट्रैफिक एसएचओ पूर्व, एसएचओ पीजीआई और आईएमटी की टीम ने हेलीपैड तक का रूट पूरी तरह ट्रैफिक-मुक्त रखा।

कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल और निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने रोहतक पुलिस का तहे दिल से धन्यवाद व्यक्त किया।

सभी टीमों और डॉक्टरों का योगदान (जिन्होंने ऑपरेशन को सफल बनाया) :


इस महाअभियान में निम्नलिखित टीमों ने अपनी अहम भूमिका निभाई:
1.) ब्रेन डेथ सर्टिफिकेशन टीम: डॉ. सुरेखा डाबला, डॉ. गोपाल कृष्ण, डॉ. तरुण यादव एवं डॉ. लव शर्मा ने NOTTO गाइडलाइंस के अनुसार दो बार ब्रेन डेथ टेस्ट किए।
2.) निश्चेतन विभाग: डॉ. तरुण ने 36 घंटे तक अंगों को वेंटिलेटर पर जिंदा रखा।
3.) ट्रॉमा टीम: चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल के नेतृत्व में डॉ. पंकज छिकारा, डॉ. राजेश रोहिल्ला, डॉ. अपर्णा परमार, डॉ. परजीत गिल, डॉ. अंकुर गोयल, डॉ. विवेक ठाकुर, डॉ. गौरव पांडे, डॉ. आर.एस. चौहान, डॉ. वरुण अरोड़ा एवं डॉ. रोहित।
4.) फोरेंसिक टीम: डॉ. लव शर्मा, डॉ. जितेंद्र जाखड़, डॉ. योगेश ने मेडिको-लीगल पोस्टमार्टम किया।
5.) SOTO हरियाणा टीम: नोडल अधिकारी डॉ. सुखबीर सिंह, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर दीप्ति खर्ब, रोहित और मीडिया सलाहकार राजेश कुमार ने परिवार काउंसलिंग, NOTTO समन्वय, अंग आवंटन और एयरलिफ्ट प्लानिंग की।
6.) जनसंपर्क विभाग: इंचार्ज डॉ. वरुण अरोड़ा और डॉ. उमेश यादव ने मीडिया व्यवस्था और जागरूकता संदेश फैलाया। इसराना और पानीपत पुलिस ने भी कानूनी प्रक्रिया में सहयोग दिया।

निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल का बयान :


निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने कहा, “यह घटना चिकित्सा क्षेत्र की उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज के लिए संदेश है। डॉ. तरुण और उनकी टीम तपस्वी की तरह काम कर रही है। पीजीआईएमएस अब अंगदान का हब बन रहा है।”

समाज का सहयोग: राजेश जैन ने दी 5 लाख की मदद


एलपीएस बोसार्ड के एमडी राजेश जैन ने परिवार से मुलाकात कर 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता घोषित की। उन्होंने कहा, “यह परिवार हरियाणा के असली हीरो हैं। हमारी कंपनी अब हर साल अंगदान जागरूकता कैंप लगाएगी।”

स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव की भावुक अपील :


हरियाणा की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री आरती सिंह राव ने परिवार को हृदय से धन्यवाद देते हुए कहा, “एक बेटे को खोकर भी इस परिवार ने छह घरों के चिराग बुझने से बचा लिए। कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल, निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल, सेना की टीम और रोहतक पुलिस बधाई के पात्र हैं।” मंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की, “अंगदान को अपना धर्म बनाइए। आज 16 साल के उस बेटे ने हमें बता दिया कि शरीर मिट्टी है, पर कर्म अमर है।”

कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल की मार्मिक अपील :


कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा, “अंगदान महादान है। 18 वर्ष की आयु के बाद फॉर्म भरिए, परिवार को अपनी इच्छा बताइए। एक व्यक्ति 8 लोगों को जीवन और 50 लोगों को नई जिंदगी दे सकता है।”

समयरेखा :


• सुबह 10 बजे: ऑपरेशन थिएटर में अंग निकासी शुरू (18 डॉक्टरों की टीम, 5 घंटे लगातार)
• दोपहर: पोस्टमार्टम पूरा, परिवार को पार्थिव देह सौंपी गई
• एमबीबीएस छात्रों, नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों ने ‘अमर रहे’ के नारों के साथ अंतिम विदाई दी

अंगदान : आंकड़े और वास्तविकता


भारत में हर साल 5 लाख लोग अंग फेल होने से मरते हैं, लेकिन अंगदान दर मात्र 0.86 प्रति मिलियन है। हरियाणा में यह और भी कम था, लेकिन पीजीआईएमएस की मुहिम से उम्मीद जगी है।यह घटना केवल एक अंगदान नहीं, बल्कि त्याग, समन्वय, पुलिस-प्रशासन-सेना और चिकित्सा टीम के सामूहिक प्रयास की जीत है। हरियाणा ने साबित कर दिया कि जब इच्छाशक्ति हो तो आसमान भी जिंदगी बचाने के लिए झुक जाता है।
अंगदान कीजिए, अमर हो जाइए।

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