कुलपति प्रो. सारस्वत ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए “आउटकम बेस्ड एजुकेशन” (Outcome Based Education) की अवधारणा को समझना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला केवल एक औपचारिक अकादमिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षण पद्धति, पाठ्यक्रम निर्माण और मूल्यांकन प्रणाली में गुणात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार की उच्च स्तरीय गहन कार्यशाला शिक्षकों एवं शैक्षणिक प्रशासकों को वैश्विक मानकों के अनुरूप शिक्षण प्रणाली विकसित करने में सहायक सिद्ध होगी।
आईक्यूएसी निदेशक प्रो. शूरवीर सिंह भाणावत ने बताया कि विश्वविद्यालय में इस प्रकार की “आउटकम बेस्ड एजुकेशन” पर केंद्रित व्यापक एवं व्यावहारिक कार्यशाला पहली बार आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा कि आईक्यूएसी लगातार विश्वविद्यालय में गुणवत्ता उन्नयन, नवाचार और संस्थागत उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए नए प्रयास कर रहा है। हाल ही में विश्वविद्यालय को NAAC द्वारा ‘A’ ग्रेड प्राप्त होना तथा NIRF रैंकिंग में उल्लेखनीय स्थान मिलना इसी दिशा में किए गए सतत प्रयासों का परिणाम है।
नई शिक्षा नीति के नोडल अधिकारी प्रो. के. बी. जोशी ने कहा कि नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों में केवल ज्ञान नहीं बल्कि कौशल, नवाचार, विश्लेषणात्मक क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने पर बल देती है। उन्होंने कहा कि “आउटकम बेस्ड एजुकेशन” विद्यार्थियों की वास्तविक सीखने की उपलब्धियों को मापने का प्रभावी माध्यम है तथा यह कार्यशाला शिक्षकों को पाठ्यक्रम, शिक्षण और मूल्यांकन को अधिक परिणामोन्मुख बनाने में व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करेगी। उन्होंने इसे शिक्षकों, विभागाध्यक्षों एवं पाठ्यक्रम निर्माण से जुड़े हितधारकों के लिए अत्यंत उपयोगी पहल बताया।
कार्यशाला के संयोजक एवं भू-विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. रितेश पुरोहित ने बताया कि कार्यशाला 22 एवं 23 मई 2026 को विश्वविद्यालय के गोल्डन जुबली गेस्ट हाउस स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित होगी। इसमें कोर्स आउटकम (Course Outcomes), प्रोग्राम आउटकम (Program Outcomes) एवं प्रोग्राम स्पेसिफिक आउटकम (Program Specific Outcomes) के निर्माण, मैपिंग, ब्लूम्स टेक्सोनोमी, मूल्यांकन प्रणाली तथा Sustainable Development Goals (SDGs) को पाठ्यक्रम में समाहित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
कार्यक्रम के मुख्य रिसोर्स पर्सन प्रो. (डॉ.) कृष्णकांत दवे होंगे, जो वर्तमान में बहारा विश्वविद्यालय, शिमला हिल्स (हिमाचल प्रदेश) के कुलपति हैं। उन्हें उच्च शिक्षा प्रशासन, गुणवत्ता आश्वासन, पाठ्यक्रम नवाचार एवं “आउटकम बेस्ड एजुकेशन” के क्षेत्र में लगभग 29 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वे पूर्व में विभिन्न विश्वविद्यालयों में कुलपति एवं वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर कार्य कर चुके हैं। प्रो. दवे ने उच्च शिक्षा में NEP-2020 आधारित सुधारों, OBE फ्रेमवर्क तथा संस्थागत गुणवत्ता संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उनके शोध कार्य, स्कोपस इंडेक्स्ड शोध पत्र एवं नेतृत्व क्षमता के लिए उन्हें “Excellence in Leadership Award” से भी सम्मानित किया जा चुका है।
इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. वी. सी. गर्ग, परीक्षा नियंत्रक डॉ. मुकेश कुमार बारबर, डॉ. नेहा पालीवाल, डॉ. हरीश, डॉ. जूही प्रधान, सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक एवं आईक्यूएसी सदस्य उपस्थित रहे।