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Saturday, March 7, 2026

News Desk / New Delhi /February 27, 2026

स्वास्थ्य विभाग, रोहतक ने नलिनी गोयल एवं आशा रानी के परिवारों को कम्युनिटी सेंटर, मॉडल टाउन तथा भामाशाह गुरुद्वारा, डीएलएफ कॉलोनी में आयोजित रस्म पगड़ी कार्यक्रम के अवसर पर सम्मानित किया। विभाग की ओर से विशेष संदेशवाहक के रूप में पूर्व मुख्य नेत्र अधिकारी डॉ. दिनेश शर्मा ने शोक संदेश एवं प्रशंसा-पत्र प्रेषित किया।

हरियाणा / स्वास्थ्य विभाग द्वारा नेत्रदानी परिवार को रस्म पगड़ी पर किया सम्मानित

अपने शोक संदेश में डॉ. रमेश आर्य ने सोहनलाल जी एवं राजेंद्र कुमार जी के आकस्मिक निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए परिवार द्वारा नेत्रदान करवाने के इस पुनीत कार्य के लिए आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि विभाग भगवान से प्रार्थना करता है कि दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में सर्वोत्तम स्थान प्रदान करें तथा परिवार को इस दुःख की घड़ी को सहन करने की शक्ति दें।

डॉ. सुरेश सिंघल, निदेशक पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि दिवंगतजन ईमानदार, मिलनसार एवं समाजसेवा के प्रति समर्पित व्यक्ति थे। उन्होंने अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखते हुए नेत्रदान कर आने वाली पीढ़ी को एक प्रेरणादायक संदेश दिया है।

राजेंद्र शर्मा, प्रधान सीनियर सिटीजन क्लब, ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि आज नेत्रों की आवश्यकता समाज के प्रत्येक वर्ग को है। प्रत्येक परिवार को इस अभियान में सहयोग करना चाहिए ताकि कोई भी व्यक्ति कॉर्निया जनित अंधता के कारण दृष्टि से वंचित न रहे।

इस अवसर पर पूर्व मुख्य नेत्र अधिकारी डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि दोनों परिवार विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों से जुड़े हुए हैं। गुरुजनों के मार्गदर्शन में उन्होंने अपने प्रियजनों का नेत्रदान कर पारिवारिक परंपरा को सार्थक किया है। इस नेत्रदान प्रक्रिया में नलिनी गोयल का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने अपने पिता की आंखें दान करवाकर समाज को प्रेरणादायक संदेश दिया। वहीं आशा रानी ने अपने पति की आंखें दान कर उन्हें अमर बना दिया।

नेत्रदान के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि मृत्यु के उपरांत लगभग 6 घंटे तक आंखें सुरक्षित रखरखाव के बाद प्रत्यारोपण हेतु उपयोग की जा सकती हैं। इसके लिए शीघ्र ही 112 पर सूचना देना आवश्यक है। नेत्रदान को सभी धर्मों में श्रेष्ठ कार्य माना गया है। नेत्रदान एवं नेत्र प्रत्यारोपण में अंतर है, तथा कुछ विशेष परिस्थितियों को छोड़कर अधिकांश मामलों में नेत्रदान संभव है। उन्होंने कहा कि हमें अपने रूढ़िवादी एवं भ्रमित विचारों को त्यागकर इस महान कार्य में भागीदारी निभानी चाहिए।

परिवार को चाहिए कि नेत्रदान का निर्णय शीघ्र लें, पार्थिव शरीर की आंखों पर गीली रूई रखें तथा तुरंत मेडिकल टीम को सूचना दें। समाजसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को भी परिवार से संवेदना व्यक्त करते हुए नेत्रदान के लिए प्रेरित करना चाहिए। मेडिकल टीम समय पर पहुंचकर सम्मानपूर्वक नेत्र प्राप्त कर नेत्र बैंक तक पहुंचाती है, जिससे कॉर्नियल अंधता से ग्रस्त व्यक्ति को दृष्टि मिल सके।

रोहतक का सौभाग्य है कि यहां नेत्र बैंक एवं नेत्र प्रत्यारोपण की सुविधा उपलब्ध है, जिससे जरूरतमंदों को शीघ्र लाभ मिल पाता है। हम सभी को नेत्रदान अभियान में सक्रिय भूमिका निभाते हुए समाज के प्रति अपना दायित्व निभाना चाहिए।

इस अवसर पर उनके दामाद डॉ. डी. आर. गोयल, शहर के गणमान्य व्यक्ति सुभाष गुप्ता, हरिओम शर्मा, अभियान से जुड़ी विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि, नेत्रदान प्रेरक जगत सिंह गिल, राजेंद्र शर्मा, सिविल सर्जन कार्यालय से फार्मेसी ऑफिसर प्रमोद नांदल, मित्रगण, सगे-संबंधी एवं समाज के सैकड़ों लोग उपस्थित रहे। पूर्व मुख्य नेत्र अधिकारी डॉ. दिनेश शर्मा ने विभाग की ओर से सभी का धन्यवाद किया तथा नेत्रदान का संदेश घर-घर तक पहुंचाने की अपील की।

विदित रहे कि नलिनी गोयल ने अपने पिता सोहनलाल जी तथा आशा रानी ने अपने पति राजेंद्र कुमार के नेत्रदान हेतु पूर्व मुख्य नेत्र अधिकारी डॉ. दिनेश शर्मा से संपर्क किया। उनके समन्वय से डॉ. राजेंद्र चौहान (इंचार्ज, आरआईओ एवं नेत्र बैंक) की टीम ने दोनों का नेत्रदान सफलतापूर्वक संपन्न कराया।

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