पुस्तक का लोकार्पण मुख्य अतिथि डॉ. अमित आर्य, कुलपति, दादा लखमीचंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (SUPVA), रोहतक तथा डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी, निदेशक, हरियाणवी प्रकोष्ठ, हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के कर-कमलों द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में साहित्य एवं शिक्षा जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनमें सुपवा विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार डॉ. गुंजन मलिक मनोचा, बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. बाबूराम, प्रेरक साहित्यिक सभा, जींद से जुड़े वरिष्ठ हरियाणवी साहित्यकार डॉ. रामफल खटकड़, वरिष्ठ साहित्यकार एवं समीक्षक ओमप्रकाश कादयान तथा शिक्षाविद एवं वरिष्ठ लेखिका सरोज दहिया प्रमुख रूप से शामिल रहे। विश्वविद्यालय के अन्य गणमान्य शिक्षकगण भी समारोह के आकर्षण का केंद्र रहे।
इस अवसर पर लेखक डॉ. मधुकांत ने एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा प्रतिवर्ष प्रदान किए जाने वाले महिला साहित्य पुरस्कार का नाम हरियाणा की वरिष्ठ साहित्यकार स्वर्गीय इंद्रा स्वप्न के नाम पर रखा जाना चाहिए। उनके इस प्रस्ताव को उपस्थित साहित्यकारों ने सराहनीय पहल बताया।
वहीं,
प्रो. बाबूराम ने विश्वविद्यालय परिसर में हरियाणा की लोकसंस्कृति के महान पुरोधा
दादा लखमीचंद पीठ की स्थापना का औपचारिक प्रस्ताव कुलपति के समक्ष रखा। इसे हरियाणवी संस्कृति और लोकधरोहर के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
समारोह के दौरान आगामी
17 जुलाई को विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाले
हरियाणवी साहित्यकार सम्मान समारोह’ की तैयारियों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। राज्य स्तरीय इस समारोह में प्रदेश के मुख्यमंत्री के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने की संभावना जताई गई।
उल्लेखनीय है कि डॉ. मधुकांत की 224वीं कृति ’
‘बाइज्जत बरी’’ न्याय व्यवस्था के भीतर छिपे मानवीय संवेदनाओं, पीड़ा और सच्चाइयों को उजागर करने का प्रयास करती है। उपस्थित विद्वानों ने इस पुस्तक को साहित्य जगत के लिए एक महत्वपूर्ण और मूल्यवान योगदान बताया।