पूर्व मुख्य नेत्र अधिकारी दिनेश शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि मोहन फाउंडेशन, नई दिल्ली की ओर से सूचना दी गई कि हांसी निवासी डॉक्टर उत्कर्ष के नानाजी भगवान दास पुत्र रामचंद्र का निधन हो गया है तथा परिवार उनकी आंखें दान करना चाहता है। सूचना मिलते ही दिनेश शर्मा ने तुरंत आई डोनेशन सेंटर, सिविल अस्पताल हिसार की टीम से संपर्क कर नेत्रदान प्रक्रिया शुरू करवाई।
इसके बाद नेत्र विभाग द्वारा विनोद मौर्य (सीनियर ऑप्थैल्मिक ऑफिसर), भूगल (ऑप्थैल्मिक ऑफिसर), मीना (नेत्रदान काउंसलर) तथा सत्यवान (टेक्निकल ऑफिसर) की टीम गठित कर हांसी के गांधी नगर स्थित निवास स्थान पर भेजा गया। टीम ने सफलतापूर्वक भगवान दास की आंखें प्राप्त कर उन्हें क्षेत्रीय नेत्र बैंक, मेडिकल कॉलेज हिसार में सुरक्षित जमा करवाया।
दिनेश शर्मा ने बताया कि मोहन फाउंडेशन लंबे समय से नेत्रदान अभियान से जुड़ा हुआ है और पूर्व में भी विभाग के साथ सहयोग करता रहा है। उन्होंने कहा कि नेत्रदान एक महान पुण्य कार्य है, जिससे किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नई रोशनी मिल सकती है।
उन्होंने परिवार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अपने प्रियजन की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए नेत्रदान करवाना समाज के लिए प्रेरणादायक कदम है। विभाग की ओर से रस्म क्रिया के दौरान विशेष संदेशवाहक के माध्यम से शोक प्रस्ताव एवं प्रशंसा पत्र भेजकर परिवार को सम्मानित किया जाएगा।
नेत्रदान प्रक्रिया में डॉ. राहुल बुद्धिराजा (एसएमओ, सिविल अस्पताल हांसी), विनोद मौर्य, भूगल, मीना, सत्यवान तथा नेत्रदान अभियान से जुड़ी विभिन्न संस्थाओं के सदस्यों का विशेष सहयोग रहा।
पूर्व मुख्य नेत्र अधिकारी दिनेश शर्मा ने नेत्र विभाग की पूरी टीम, सामाजिक संस्थाओं और मोहन फाउंडेशन, नई दिल्ली का विशेष धन्यवाद किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी इस प्रकार के सहयोग से नेत्रदान अभियान निरंतर आगे बढ़ता रहेगा और अधिक से अधिक लोगों तक रोशनी पहुंचाई जा सकेगी।