ढांडा ने बताया कि हरियाणा सरकार ने हाल ही में एक नई नीति लागू की है, जिसके तहत 35,000 एकड़ से अधिक जमीन किसानों से ली जाएगी। उन्होंने इसे "किसान हितैषी" बताए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा, "यह नीति किसानों के लिए नहीं, बल्कि बीजेपी नेताओं और बड़े व्यापारियों के लिए बनाई गई है।"
उन्होंने बताया कि 10 एकड़ से कम जमीन वाले किसान, जो हरियाणा में 95% से अधिक हैं, अपनी जमीन सीधे सरकार को नहीं दे सकते। इसके लिए सरकार ने बिचौलियों (एग्रीगेटर्स) को नियुक्त किया है, जो सर्कल रेट पर जमीन लेकर सरकार को सौंपेंगे। ढांडा ने आरोप लगाया, "ये बिचौलिये सस्ते दामों पर किसानों की जमीन हड़पेंगे और सरकार उसे बड़े व्यापारियों को करोड़ों में बेचेगी। इस पूरी प्रक्रिया में बीजेपी नेताओं को मोटा मुनाफा होगा।"
उन्होंने 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें किसानों को मार्केट रेट का चार गुना मुआवजा देने का प्रावधान था, लेकिन हरियाणा सरकार की इस नीति में अधिकतम सर्कल रेट का तीन गुना ही दिया जाएगा। बिचौलियों को प्रति एकड़ 3,000 रुपये का इनाम देने की बात भी कही गई है, जो ढांडा के अनुसार, किसानों की लूट को बढ़ावा देगा।
AAP नेता ने यह भी बताया कि नीति में छोटे किसानों को प्रोजेक्ट में कोई हिस्सेदारी नहीं दी जाएगी। न ही उन्हें डेवलप्ड सेक्टर में प्लॉट या अन्य लाभ मिलेगा। साथ ही, 10 एकड़ से कम जमीन वाले किसानों को पूरी जमीन देनी होगी, अन्यथा वे इस नीति में भाग नहीं ले सकते। भूमिहीन मजदूरों और गांवों के पुनर्वास के लिए भी कोई योजना नहीं है।
ढांडा ने बीजेपी नेताओं पर जमीन खरीद के जरिए मुनाफा कमाने का आरोप लगाया। उन्होंने मांग की कि सरकार पिछले दो साल के जमीन खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड सार्वजनिक करे, ताकि यह साफ हो कि कौन से नेता इस नीति से फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने बीजेपी नेता अनिल विज पर भी निशाना साधा, जिन्होंने 2011-12 में अंबाला में उपजाऊ जमीन के अधिग्रहण का विरोध किया था, लेकिन अब चुप हैं।
उन्होंने विपक्षी दल कांग्रेस पर भी सवाल उठाए। ढांडा ने कहा, "कांग्रेस और भूपेंद्र सिंह हुड्डा इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं? क्या वे बीजेपी के साथ मिले हुए हैं?" उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा में बीजेपी की सरकार कांग्रेस की मदद से बनी थी, और आज भी यह साठगांठ जारी है।
पंजाब की एक समान नीति का जिक्र करते हुए ढांडा ने कहा कि वहां AAP सरकार ने किसानों के विरोध के बाद नीति वापस ले ली थी। उन्होंने हरियाणा सरकार से भी इस नीति को वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा, "हम किसानों के साथ हैं और इस मुद्दे को अंत तक लेकर जाएंगे। अगर सरकार रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं करती, तो हम खुद खुलासा करेंगे कि कौन कितना मुनाफा कमा रहा है।"
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ढांडा ने हरियाणा में कानून-व्यवस्था की स्थिति, टोल प्लाजा पर गुंडागर्दी, और SYL नहर जैसे मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि हरियाणा में नागरिक सुरक्षा सबसे खराब है और विपक्ष इस पर चुप है। SYL पर उन्होंने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की।