Tranding
Friday, August 29, 2025

24JT News Desk / New Delhi /August 21, 2025

हरियाणा के भिवानी में एक युवती मनीषा की मौत का मामला चर्चा में है। पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया, लेकिन मशहूर एडवोकेट प्रदीप मलिक कहते हैं कि यह हत्या है, आत्महत्या नहीं। उनका दावा है कि मनीषा के साथ यौन उत्पीड़न हुआ और फिर गला घोंटकर उसकी हत्या की गई। मलिक का कहना है कि भिवानी के पहले पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट सही है, जबकि पीजीआई की दूसरी रिपोर्ट में गड़बड़ियां हैं और इसे बदला गया हो सकता है।

Photo Source : @gurukulofpolitics/YouTube/ScreenShot
हरियाणा / मनीषा की मौत: आत्महत्या या हत्या? जांच में गड़बड़ी ने बढ़ाया रहस्य ! - एडवोकेट प्रदीप मलिक

जब कोई अपराध होता है, तो पुलिस घटनास्थल को सुरक्षित करती है और सबूत इकट्ठा करती है। डॉक्टर शव की जांच करते हैं और फोरेंसिक रिपोर्ट बनाते हैं। वकील इन सबूतों को देखकर अदालत में केस लड़ते हैं। मनीषा के मामले में पुलिस ने घटनास्थल को ठीक से नहीं संभाला, जिससे कई सबूत खराब हो गए। पुलिस ने बिना पूरी जांच के इसे आत्महत्या कह दिया। भिवानी और पीजीआई की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कई बातें अलग-अलग हैं, जिससे मामला और उलझ गया।

पोस्टमॉर्टम में क्या गड़बड़ियां मिलीं? ;


दोनों पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में ये अंतर पाए गए:
- आंखों का हाल: भिवानी की रिपोर्ट कहती है कि मनीषा की आंखों की पुतलियां गायब थीं, लेकिन पीजीआई की रिपोर्ट में कहा गया कि आंखें सड़ी हुई थीं, पर मौजूद थीं।
- शरीर के अंग: किडनी और तिल्ली के कुछ हिस्से गायब थे या उनकी जानकारी गलत दी गई।
- मिट्टी और घास: पीजीआई में शव पर मिट्टी और पौधे मिले, जो पहली जांच के बाद साफ होने के बावजूद अजीब है।
- कपड़े: भिवानी की रिपोर्ट में कपड़ों के फटने और संघर्ष के निशान थे, लेकिन पीजीआई की रिपोर्ट में इसकी अनदेखी की गई।

ये गड़बड़ियां पीजीआई की रिपोर्ट पर सवाल उठाती हैं। मलिक का कहना है कि जानबूझकर या जल्दबाजी में सबूतों को नजरअंदाज किया गया, जिससे जांच कमजोर हो गई।

मृत्यु का कारण और घटनास्थल


मलिक का कहना है कि मनीषा की मौत गला घोंटने से हुई। गले पर गहरे निशान और टूटी हड्डी इसकी पुष्टि करते हैं। कपड़ों पर संघर्ष के निशान और घुटनों पर चोटें बताती हैं कि मनीषा ने विरोध किया था। शव का निचला हिस्सा बिल्कुल ठीक था, जो दर्शाता है कि चोटें जानवरों की नहीं थीं।
पुलिस ने जो आत्महत्या का नोट बताया, वह मलिक के अनुसार नकली या दबाव में लिखा गया हो सकता है। जहर खाने की बात भी अजीब है, क्योंकि लोग आमतौर पर छिपकर जहर लेते हैं, न कि खुले मैदान में।

पुलिस की गलतियां :


पुलिस ने कई बड़ी गलतियां कीं:
- घटनास्थल को सुरक्षित नहीं किया, जिससे सबूत खराब हो गए।
- मोबाइल डेटा, टायर के निशान और गवाहों जैसे सबूतों को ठीक से नहीं देखा।
- अलग-अलग पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को बिना सुलझाए स्वीकार कर लिया।
- जांच में देरी हुई और राजनीतिक दबाव ने इसे और बिगाड़ दिया।

इन गलतियों से सबूत कमजोर हो गए, जिससे मनीषा को न्याय मिलना मुश्किल हो गया। मलिक कहते हैं कि अगर आरोपी पकड़े भी गए, तो कमजोर सबूतों के कारण वे बच सकते हैं।

यौन उत्पीड़न और हत्या का दावा :


मलिक का कहना है कि मनीषा के साथ यौन उत्पीड़न हुआ, जैसा कि फटे कपड़ों और संघर्ष के निशानों से पता चलता है। इसके बाद उसकी गला घोंटकर हत्या की गई। जहर के कोई लक्षण नहीं मिले, जो आत्महत्या के दावे को गलत साबित करता है।

सीबीआई पर भरोसा क्यों नहीं?


मलिक को सीबीआई की जांच पर शक है। उनका कहना है कि पहले भी आरुषि और सुशांत सिंह राजपूत जैसे मामलों में सीबीआई की देरी ने पीड़ित परिवारों का दुख बढ़ाया। बिना जल्दी और सही जांच के सबूत खराब हो जाते हैं, जिससे केस कमजोर पड़ता है।

मलिक ने लोगों से अपील की है कि वे तथ्यों और सबूतों के आधार पर राय बनाएं, न कि अफवाहों या राजनीति के आधार पर।

मनीषा की मौत का मामला जांच में गड़बड़ियों को उजागर करता है। अलग-अलग पोस्टमॉर्टम, नजरअंदाज किए गए सबूत और पुलिस की लापरवाही ने इसे उलझा दिया। मलिक का मानना है कि यह यौन उत्पीड़न के बाद हत्या का मामला है। यह केस दिखाता है कि पुलिस और जांच में गलतियां पीड़ितों को न्याय से वंचित कर देती हैं। अब जरूरत है तुरंत और निष्पक्ष जांच की, ताकि मनीषा को इंसाफ मिले।

Subscribe

Trending

24 Jobraa Times

भारतीय लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को बनाये रखने व लोकतंत्र को जिंदा रखने के लिए सवंत्रता, समानता, बन्धुत्व व न्याय की निष्पक्ष पत्रकारिता l

Subscribe to Stay Connected

2025 © 24 JOBRAA - TIMES MEDIA & COMMUNICATION PVT. LTD. All Rights Reserved.