अनिल रंगा ने वीडियो में बताया कि स्कूल की लगभग 75 प्रतिशत इमारत जर्जर हालत में है। छतें बारिश के कारण टूट रही हैं और कभी भी गिरने का खतरा बना हुआ है। स्कूल में कक्षाओं का संचालन बेहद चुनौतीपूर्ण है। पहली से पाँचवीं कक्षा तक के बच्चे एक ही कमरे में पढ़ने को मजबूर हैं, जहाँ पाँच अलग-अलग कक्षाओं की पढ़ाई एक साथ होती है। इसी तरह, छठी, सातवीं और आठवीं कक्षा के छात्र भी एक ही कमरे में पढ़ते हैं, जहाँ तीन शिक्षकों को एक साथ तीन कक्षाओं को पढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
Photo Source : Anil Ranga / Facebook / screen shot
खास तौर पर, दसवीं और बारहवीं की बोर्ड कक्षाएँ, जो विद्यार्थियों के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, एक ही कमरे में संचालित हो रही हैं। अनिल रंगा ने वीडियो में एक छात्र से बातचीत में पुष्टि की कि दसवीं कक्षा में 20 और बारहवीं कक्षा में 24 छात्र हैं। छात्रों ने शिकायत की कि एक ही कमरे में दो बोर्ड कक्षाओं की पढ़ाई होने से भारी परेशानी होती है। रंगा ने कहा, "जब शिक्षक एक कक्षा को पढ़ाते हैं, तो दूसरी कक्षा के छात्रों को समझने में दिक्कत होती है। इससे पढ़ाई में बहुत व्यवधान पड़ता है।"
स्कूल में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति भी चिंताजनक है। पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है, और पंखों की कमी के कारण बच्चे धूप में पढ़ने को मजबूर हैं। लड़के और लड़कियों के शौचालयों में सफाई का कोई इंतजाम नहीं है। शौचालयों के आसपास कचरा और घास जमा है, जिससे कीड़े-मकोड़ों और साँपों का खतरा बना रहता है। मिड-डे मील की रसोई की हालत भी बदतर है। रंगा ने बताया, "रसोई की इमारत जर्जर है, जहाँ चूहे और साँप आसानी से घुस सकते हैं। खाना बनाने में दिक्कत होती है, और ये रसोई भी कभी भी ढह सकती है।"
वीडियो में स्कूल की जर्जर इमारतों को दिखाते हुए रंगा ने कई कमरों पर लगे ताले और टूटी छतों को भी उजागर किया। उन्होंने कहा, "कई कमरे पूरी तरह असुरक्षित हैं। बच्चों को ऐसी जगह पढ़ाना खतरे से खाली नहीं है।" स्कूल परिसर में सफाई और रखरखाव की कमी साफ तौर पर देखी जा सकती है, जो बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।
अनिल रंगा ने हरियाणा सरकार से इस मामले में तत्काल कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने जोर देकर कहा, "मैं सरकार से निवेदन करता हूँ कि इस स्कूल की स्थिति पर गंभीरता से ध्यान दे और जल्द से जल्द नई इमारत का निर्माण कराए, ताकि गरीब परिवारों के बच्चे भी बेहतर शिक्षा पा सकें और देश का नाम रोशन कर सकें।"
यह स्थिति न केवल जसराना गाँव के स्कूल की बदहाली को दर्शाती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था की कमियों को भी उजागर करती है। ऐसी परिस्थितियाँ बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित करती हैं, जिसका दीर्घकालिक असर उनके भविष्य पर पड़ सकता है।
बच्चों को ऐसी स्थिति में पढ़ना पड़ रहा है, जहाँ न तो सुरक्षा है और न ही सुविधाएँ। सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।