कुलसचिव का ई-रिक्शा रोका, घेराव के बाद सौंपा ज्ञापन
जैसे ही विद्यार्थियों को कुलसचिव के पिछले गेट से निकलने की सूचना मिली, उन्होंने तुरंत एडम ब्लॉक के बाहर उनके ई-रिक्शा का घेराव कर लिया। दीपक धनखड़ ने साफ शब्दों में कहा, "जब तक हमारी मांगों पर चर्चा नहीं होगी, हम कुलसचिव को जाने नहीं देंगे।" काफी देर की तनातनी के बाद कुलसचिव ने विद्यार्थियों की बात सुनी और उनका ज्ञापन स्वीकार किया।
कुलसचिव का रवैया शर्मनाक, विश्वविद्यालय विद्यार्थियों से ही चलता है"
दीपक धनखड़ ने कुलसचिव के व्यवहार की कड़ी निंदा करते हुए कहा, "विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के भरोसे और फीस से चलता है। कुलसचिव का इस तरह छुपकर भागना न केवल शर्मनाक है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था और लोकतंत्र की हार है। समस्याओं का समाधान भागने से नहीं, बल्कि संवाद से होगा।"
डीन ने दिया सकारात्मक आश्वासन
घटना के बाद
ASAP के प्रतिनिधिमंडल ने डीन एकेडमिक प्रो. एस.सी. मलिक से मुलाकात की और उन्हें भी ज्ञापन सौंपा। डीन ने विद्यार्थियों की मांग को जायज बताते हुए भरोसा दिलाया कि विश्वविद्यालय इस मुद्दे पर जल्द निर्णय लेगा।
"सीटें नहीं बढ़ीं तो सैकड़ों छात्रों का भविष्य दांव पर"
ASAP के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमन आलडिया और उपाध्यक्ष रॉबिन मलिक ने कहा कि सभी काउंसलिंग राउंड पूरे हो चुके हैं, फिर भी सैकड़ों विद्यार्थी दाखिले की उम्मीद लगाए बैठे हैं। अधिकांश छात्रों ने केवल एमडीयू में ही आवेदन किया था, और उनके पास अब कोई दूसरा विकल्प नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सीटें नहीं बढ़ाई गईं तो कई छात्रों का एक साल बर्बाद हो सकता है।
"जरूरत पड़ी तो करेंगे बड़ा आंदोलन"
ASAP के प्रदेश सोशल मीडिया इंचार्ज साहिल चांवरिया और छात्र नेता नितिन ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय ने जल्द ही 20% सीटें बढ़ाने का फैसला नहीं लिया, तो वे बड़े आंदोलन के लिए तैयार हैं।