बैठक के दौरान निजी मंडी यार्ड संचालकों ने मंडी शुल्क में हिस्सेदारी बढ़ाने और समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद में आढ़त सुनिश्चित कराने की मांग उठाई। निदेशक श्री चौहान ने इन मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए आश्वासन दिया कि विभाग इस दिशा में जरूरी कदम उठाएगा।
कृषि विपणन निदेशक ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी निजी मंडी यार्ड संचालक सुनिश्चित करें कि मंडी परिसरों में किसानों को आवश्यक सुविधाएं – जैसे तौल, भंडारण, शुद्ध पेयजल, विश्राम स्थल आदि – समय से और बेहतर रूप में उपलब्ध करवाई जाएं। जिन निजी मंडियों में अब तक निर्माण कार्य अधूरा है, उन्हें शीघ्र पूर्ण कर व्यापारिक गतिविधियां आरंभ करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि किसानों को फसल की बिक्री में किसी प्रकार की असुविधा न हो और उन्हें उनकी उपज का वाजिब मूल्य मिल सके।
निदेशक ने संबंधित मंडी सचिवों को निर्देशित किया कि वे आगामी 15 दिनों के भीतर निजी मंडी यार्ड संचालकों के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं का समाधान करें। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि निदेशालय स्तर पर हर तीन महीने में एक समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें निजी मंडी यार्डों की प्रगति और चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी।
इसके अलावा, मंडी शुल्क में पारदर्शिता बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अनियमितता या चोरी को रोकने के लिए निदेशक ने प्रवर्तकों और मंडी सचिवों को सतर्क रहने और आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
यह बैठक प्रदेश में कृषि विपणन प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ करने तथा किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने की दिशा में एक अहम पहल के रूप में देखी जा रही है।